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'बृजभूषण सिंह ने हर मौके पर महिला पहलवानों का शोषण किया', दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में क्या-क्या बताया?

Brij Bhushan Singh News: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह पर लगे महिला पहलवानों के शोषण के आरोप पर दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कई बातें कही हैं। दिल्ली पुलिस ने राऊज एवेन्यू कोर्ट में कहा कि बृजभूषण शरण सिंह ने उन महिला पहलवानों का शोषण किया है, जिन्होंने उनके खिलाफ उत्पीड़न के आरोप दायर किए हैं।

छह महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न मामले में आरोप पत्र दायर होने के बाद दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत बृजभूषण के खिलाफ आरोप तय करने के लिए दलीलें सुन रही थी। इस दलील में दिल्ली पुलिस ने कहा कि 'बृजभूषण सिंह ने हर मौके पर महिला पहलवानों का शोषण किया है, उन्हें हर बार पता था कि वो क्या कर रहे हैं।'

Brij Bhushan Sharan Singh delhi police

दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि बृजभूषण सिंह को पता था कि वह क्या कर रहे हैं और उनका इरादा पहलवानों की गरिमा को ठेस पहुंचाना था। उन्होंने यह भी बताया कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ तीन तरह के सबूत हैं जो आरोप तय करने के लिए काफी हैं। इनमें आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत धारा 161 (पुलिस द्वारा गवाहों की जांच) और 164 (मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए गए बयान) के तहत एक लिखित शिकायत और दो दर्ज किए गए बयान शामिल हैं।

'बृजभूषण सिंह के खिलाफ आरोप तय करना अदालत का काम'

अतुल श्रीवास्तव ने आगे कहा कि, बृजभूषण सिंह के खिलाफ आरोप तय करना अदालत के अधिकार क्षेत्र में है। उन्होंने बृजभूषण सिंह के वकील के उस तर्क का भी खंडन किया कि भारत के बाहर हुए मामलों के लिए सीआरपीसी की धारा 188 के तहत मंजूरी की जरूरत होती है।

अतुल श्रीवास्तव ने पहले के एक फैसले का हवाला दिया और तर्क दिया कि मंजूरी की जरूरत केवल तभी होगी जब सभी अपराध भारत के बाहर किए गए हों। उन्होंने कहा कि अपराध दिल्ली के साथ-साथ अन्य स्थानों पर भी हुए, इसलिए मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।

बृजभूषण के वकील राजीव मोहन ने पहले कहा था कि दिल्ली की अदालत के पास देश के बाहर हुए अपराधों पर फैसला लेने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, जब तक कि मंजूरी ना मिले।

'बृजभूषण के साथ मिला हुआ था WFI के पूर्व अतिरिक्त सचिव'

अतुल श्रीवास्तव ने अदालत को यह भी बताया कि मामले के सभी गवाहों ने कहा कि सह-अभियुक्त विनोद तोमर ने बृजभूषण के कृत्यों में मदद की है और उसे बढ़ावा दिया। डब्ल्यूएफआई के पूर्व अतिरिक्त सचिव के रूप में अपने निलंबन से पहले विनोद तोमर ने बृजभूषण सिंह के साथ मिलकर काम किया था।

अभी जमानत पर हैं बृजभूषण सिंह

दिल्ली पुलिस ने छह बार के सांसद बृजभूषण के खिलाफ 15 जून को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल), 354 ए (यौन उत्पीड़न), 354 डी (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप पत्र दायर किया था।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने 20 जुलाई को बृजभूषण सिंह और निलंबित डब्ल्यूएफआई के अतिरिक्त सचिव विनोद तोमर को जमानत दे दी थी।

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