Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

दिल्ली हाई कोर्ट ने AIMIM के राजनीतिक अधिकारों को किया बरकरार, जानें कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को डी-रजिस्टर करने की याचिका खारिज कर दी है।

असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली इस पार्टी के खिलाफ याचिका में दावा किया गया था कि पार्टी का उद्देश्य एक धार्मिक समुदाय के हितों को आगे बढ़ाना है। हालांकि, न्यायालय ने इसे अस्वीकार कर दिया और एआईएमआईएम के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा की।

Delhi High Court

क्या है याचिका और न्यायालय मुख्य बिंदु...

याचिका के मुख्य बिंदु:

  • याचिकाकर्ता तिरुपति नरसिंह मुरारी ने आरोप लगाया कि एआईएमआईएम का संविधान केवल मुसलमानों के हितों की बात करता है।
  • उन्होंने यह तर्क दिया कि यह भारत के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन करता है।
  • उन्होंने पार्टी के पंजीकरण को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की।

न्यायालय का रुख:

  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29ए: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एआईएमआईएम इस धारा की सभी शर्तों का पालन करती है।
  • न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने कहा कि राजनीतिक दल बनाना और अपनी विचारधारा व्यक्त करना एक मौलिक अधिकार है।
  • न्यायालय ने कहा कि यह याचिका एआईएमआईएम के संवैधानिक अधिकारों में अनुचित हस्तक्षेप है।

एआईएमआईएम के पक्ष में मुख्य तर्क

  • एआईएमआईएम के वकीलों ने कहा कि पार्टी के उद्देश्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया।
  • पार्टी के संविधान में समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धांतों का पालन स्पष्ट रूप से दर्ज है।
  • पार्टी ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत आवश्यक सभी संशोधनों को लागू किया है।

याचिका की पृष्ठभूमि

  • यह याचिका 2018 में मुरारी द्वारा दायर की गई थी, जब वह शिवसेना के सदस्य थे।
  • अब वह भाजपा से जुड़े हुए हैं, और उनकी दलील को लेकर न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि उनकी मंशा संदिग्ध हो सकती है।
  • उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव आयोग को किसी भी पार्टी का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार बहुत सीमित है।

न्यायालय का अंतिम निष्कर्ष

  • न्यायालय ने याचिका को गैर-मर्यादित करार देते हुए खारिज कर दिया।
  • न्यायालय ने दोहराया कि किसी पार्टी के राजनीतिक अधिकारों में बिना ठोस आधार के हस्तक्षेप संविधान के खिलाफ है।
  • चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र को लेकर मुरारी की मांगों को अस्वीकार कर दिया गया।

एआईएमआईएम और राजनीतिक स्वतंत्रता
यह फैसला एआईएमआईएम के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है और राजनीतिक दलों के स्वतंत्र अधिकारों की पुष्टि करता है। यह भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक विविधता और मौलिक अधिकारों को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+