ग्रीनपीस के फंड को रोकने पर हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय को थमाया नोटिस
भोपाल। ग्रीनपीस इंडिया के विदेशी धन को बंद करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने गृह मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए आदेश दिया कि ग्रीनपीस के बंद किये गए फंड को आरबीआई खाते से एनजीओ के आईडीबीआई के एफसीआरए खाते में जमा करे। 10 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई तक इस पैसे को सावधि जमा में रखना होगा। ग्रीनपीस से जुड़े और मध्य प्रदेश समाजिक क्षेत्र में काम कर रहे अविनाश कुमार चंचल ने बताया कि ग्रीनपीस इंडिया ने पिछले हफ्ते दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके गृह मंत्रालय से एफसीआरए के तहत विदेशी धन की अवैध निषेध पर जवाब मांगा था। हाई कोर्ट के निर्णय के अनुसार गृह मंत्रालय को अब अगले दो हफ्ते में याचिका का जवाब देना होगा।

वहीं ग्रीनपीसइंडिया के कार्यकारी निदेशक समित आईच के मुताबिक हाईकोर्ट के फैसले ने गृह मंत्रालय के उस रवैये पर प्रकाश डाला है जिसमें सरकार लोकतंत्र में विरोध की आवाज को वित्तिय जांच के नाम पर दबाने की कोशिश कर रही है। ग्रीनपीस इंडिया भारत के सभी कानूनों का पालन करती है और वह किसी भी तरह की जांच के लिये तैयार है, लेकिन सरकार की तरफ से संवाद के अभाव को देखते हुए गैर सरकारी संगठन यह समझने को मजबूर हो रहा है कि सरकार कॉर्पोरेट एजेंडे को पूरा करने के लिए उसे बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
इसके पहले 17 जूलाई 2014 को ग्रीनपीस इंडिया ने गृह मंत्रालय को लिखकर मांग की थी कि उसे संबंधित कागजात दिये जायें जिसके आधार पर एफसीआरए को रोका गया था लेकिन अभी तक सरकार ने उस चिट्ठी का कोई जवाब नहीं दिया है। भारत सरकार ने गुप्त तरीके से ग्रीनपीस इंडिया को विदेशी धन मिलने से रोक दिया है और इस कार्यवाही के बारे में कोई जानकारी देने से इन्कार कर दिया है। ग्रीनपीस इंडिया विदेशी धन को प्राप्त करने के अपने अधिकारों के भीतर है लेकिन सरकार ने बिना किसी संवाद के एनजीओ के विदेशी धन को बंद कर दिया है।
आईच ने आगे कहा, "हमलोगों से अभी तक गृह मंत्रालय की तरफ से किसी भी तरह का आधिकारिक संवाद नहीं स्थापित किया गया है। हम मांग करते हैं कि सरकार को तुरंत हमारे सवालों का जवाब देना चाहिए। इसी पार्दर्शिता के लिए ग्रीनपीस इंडिया ने न्यायालय में याचिका दाखिल किया है और मंत्रालय तथा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से जानना चाह रही है कि आखिर किन कारणों से ग्रीनपीस इंडिया के खिलाफ कार्रवाई की गयी
प्रेसनोट पर आधारित।












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