दिल्ली: चुनाव में होगा भाजपा को फायदा तो रोयेंगे केजरीवाल!
नई दिल्ली| सोमवार को दिनभर चली राजनैतिक उठा-पटक के बाद सभी दलों ने ( बीजेपी, कांग्रेस और आप) ने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग से साफ तौर पर कहा कि वो तीनों राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है इसलिए राज्य में रीइलेक्शन ही विकल्प है। जिस पर आज नजीब जंग राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपनी रपट भेजेंगे। सभी दलों ने दिल्ली में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की इच्छा व्यक्त की है।
मालूम हो कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात की और सभी ने राष्ट्रीय राजधानी में नए सिरे से चुनाव कराने का आग्रह किया। इसके साथ ही राज्य में नौ महीनों से जारी राजनीतिक अनिश्चितता समाप्त हो चली है और चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। तीनों दलों के नेताओं ने जंग से कहा कि चूंकि 70 सदस्यीय विधानसभा में कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, लिहाजा नए सिरे से चुनाव अनिवार्य है।
जिसके बाद टीवी चैनलों पर फिर से दिल्ली को लेकर राजनैतिक बहस छिड़ गई है। ज्यादातर राजनैतिक पंडितों का मानना है कि दिल्ली में दोबारा चुनाव होने में सबसे ज्यादा नुकसान केजरीवाल की पार्टी आप को है और फायदा सिर्फ और सिर्फ बीजेपी को है।
क्योंकि दिल्ली की जनता कांग्रेस से बुरी तरह से ऊबी हुई थी और उसने बड़ी ही उम्मीदों से आप पार्टी को मौका दिया था लेकिन अरविंद केजरीवाल के आक्रामक रवैये ने उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। केजरीवाल ने जनता का भरोसा खोया है। ऐसे में उन सबके सामने बीजेपी ही एक मात्र विकल्प है। वैसे भी देश में बीजेपी की ही सरकार है और जब से नरेन्द्र मोदी पीएम बने है तब से ही देश में कुछ बदलाव के आसार दिख रहे हैं ऐसे में कहा जा रहा है कि दिल्ली में सरकार बीजेपी ही बनने के आसार है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष दिसंबर में हुए चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा बनी थी। भाजपा 31 सीटें हासिल कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, लेकिन उसने सरकार बनाने से इंकार कर दिया था।
आप 28 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर थी। आप की इस उपलब्धि पर पूरा देश चकित हो गया था। आप ने कांग्रेस के समर्थन से अल्पमत सरकार भी बनाई।लेकिन यह सरकार 49 दिनों बाद ही चली गई, क्योंकि मुख्यमंत्री और आप संस्थापक अरविंद केजरीवाल ने जन लोकपाल विधेयक पारित न हो पाने पर इस्तीफा दे दिया था।
दिल्ली चुनाव में होगा भाजपा को फायदा तो रोयेंगे केजरीवाल!
उसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में केजरीवाल भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से वाराणसी में चुनाव हार गए। बाद में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर उन्होंने गलती की। दिसंबर 2013 में पहली बार दिल्ली में त्रिकोणीय लड़ाई हुई थी। कांग्रेस जहां 15 वर्षो से शासन कर रही थी, उसे इस बार चुनाव में सिर्फ आठ सीटें हासिल हुई थीं।
इस वर्ष मई में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा दिल्ली की सातों सीटें जीतने में कामयाब हुई, तो आप हर जगह दूसरे स्थान पर रही और कांग्रेस छह सीटों पर तीसरे तथा एक सीट पर चौथे स्थान पर चली गई। लेकिन लोकसभा चुनाव के कारण दिल्ली विधानसभा में भाजपा की सदस्य संख्या 31 से घटकर 28 हो गई, क्योंकि उसके तीन विधायक संसद के लिए निर्वाचित हो गए। आप के एक विधायक द्वारा पहले ही बगावत करने के बाद उसके पास 27 विधायक रह गए।













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