Delhi Violence: दिल्ली की अदालत ने दिया आदेश, उमर खालिद को जेल की सेल से बाहर आने दिया जाए
नई दिल्ली। दिल्ली हिंसा के आरोपी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद ने तिहाड़ जेल पर आरोप लगाया था कि उसे जेल की कोठरी से बाहर नहीं निकलने दिया जाता और एकांतवास में रखा जाता है। इसके साथ ही उसने कोर्ट से कहा कि मुझे सुरक्षा की आवश्यकता है, लेकिन सुरक्षा का मतलब यह नहीं कि मुझे बंधक बना दिया जाए, मैं अपने सेल से बाहर ना जा पाऊं। यह एक सजा की तरह है, मुझे यह सजा क्यों दी गई है? इसपर तिहाड़ जेल ने ऐसा जवाब दिया जिसे कोर्ट ने बेहद विचित्र और अजीब बताया।
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तिहाड़ जेल ने अपने जवाब में कहा है कि उमर खालिद को ऐसी सेल में रखा गया है, जहां से आसपास की लगभग आधी जेल और कैदियों को देखा जा सकता है। इस जवाब पर कोर्ट ने जेल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने इस जवाब को बेहद विचित्र और अजीब बताते हुए निर्देश दिया कि जेल प्रशासन नियमों का पालन करे। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा कि किसी भी कैदी को सेल में बंधक की तरह नहीं रखा जा सकता है। इसलिए खालिद को सेल से बाहर आने दें और अन्य कैदियों से बात भी करने दें।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में इस साल फरवरी में हुई हिंसक घटनाओं के अरोपी उमर खालिद को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत के सामने पेश किया गया। इस दौरान उमर ने कोर्ट से कहा कि उसका दोष साबित हुए बगैर उसके साथ तिहाड़ जेल में दोषियों जैसा बर्ताव किया जा रहा है। वह ना तो अपनी सेल से बाहर जा सकता है और ना ही किसी से बात कर सकता है। बतौर उमर खालिद, उसके साथ हो रहे इस तरह के बर्ताव से वह अवसाद और अन्य बीमारियों का शिकार बन रहा है। आरोपी की शिकायत पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जेल प्रशासन को शुक्रवार को जवाब देने को कहा था।
हालांकि जेल प्रशासन ने इन आरोपों को निराधार बताया है। बता दें कि उमर खालिद के खिलाफ एफआईआर में पुलिस ने दावा किया है कि सांप्रदायिक हिंसा एक "पूर्व-निर्धारित साजिश" थी, जिसे कथित रूप से खालिद और दो अन्य लोगों द्वारा रचा गया था। उसपर देशद्रोह, हत्या, हत्या के प्रयास, धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और दंगा करने को लेकर भी मामला दर्ज किया गया है।












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