Delhi Chalo: किसान आंदोलन का दूसरा दिन, केंद्र के साथ बैठक कल, क्या बोले किसान नेता? दिनभर के बड़े अपडेट्स
अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत किसानों के दिल्ली में प्रवेश की जिद के बीच केंद्र पर भी दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। इस बीच किसान नेताओं ने केंद्र के साथ कल होने वाली बैठक को सहमति दी है। बुधवार शाम पंजाब किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने दावा किया कि किसानों को आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण है और वे केंद्र से साथ बातचीत के जरिए शांतिपूर्वक ही किसानों के मुद्दों का समाधान चाहते हैं।
किसान एमएसपी और कर्ज माफी की कानूनी गारंटी, स्वामिनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने और लखीमपुर खीरी हादसे पर सख्त एक्शन की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। इस हफ्ते मंगलवाल से दिल्ली में प्रवेश के लिए किसानों का कूच जारी है। हालांकि अब तक आंदोलनरत किसान का काफिला राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश नहीं कर पाया है। पंजाब-हरियाणा के सिंधु बॉर्डर पर किसान और पुलिस के बीच गतिरोध जारी है।

इस बीच आंदोलन के दूसरे दिन किसान नेता पंजाब किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि विरोध पूरी तरह से शांतिपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, "हम तकरार नहीं चाहते हैं। इस तरह की पोजीशन में हम वार्ता चाहते हैं। अगर कोई हल करे तो हम तैयार हैं। हमारा दिल्ली जाने का सवाल नहीं है। कल शाम पांच बजे केंद्र से साथ बैठक तय हुई है। हालांकि कल भी हम शांतिपूर्वक विरोध पर बैठेंगे।"
किसान नेताओं, 3 केंद्रीय मंत्रियों के बीच होगी बैठक
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने यहां कहा कि केंद्रीय मंत्रियों का एक दल बृहस्पतिवार शाम को किसान नेताओं के साथ बैठक करेगा। किसान नेता ने कहा कि बैठक केंद्रीय मंत्रियों-अर्जुन मुंडा, पीयूष गोयल और नित्यानंद राय के साथ होगी। दोनों पक्षों के बीच यह तीसरे दौर की बैठक होगी।
बुधवार की मीटिंग में क्या हुई बात
केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ किसान नेताओं की बुधवार एक वर्चुअल मीटिंग हुई। बैठक के बाद किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि एक लंबी चर्चा हुई, जिसमें सीमाओं पर सामान्य स्थिति बहाल करने की मांग की गई। दल्लेवाल ने बताया कि उन्हें केंद्र सरकार से एक पत्र मिला है, जिसमें कल (चंडीगढ़ में) बैठक आयोजित करने की बात कही गई है।
दिल्ली हमसे दूर नहीं: राकेश टिकैत
किसान आंदोलन को लेकर भाकियू के अध्यक्ष नरेश टिकैत और राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अभी भले ही वह इस आंदोलन में शामिल नहीं हैं लेकिन सभी किसान हैं और सबकी अपनी समस्याएं हैं। यदि दिल्ली जा रहे किसानों पर अत्याचार हुआ, तो वह भी दिल्ली पहुंच जाएंगे। किसान और दिल्ली हमसे दूर नहीं है।
दिल्ली में व्यवसाय पर असर
किसानों के दिल्ली कूच और राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर कड़ी निगरानी का असर अब दिल्ली की बाजारों पर पड़ने लगा है। व्यापारियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की संख्या में 75 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, वहीं 15 हजार से ज्यादा व्यवसायिक वाहनों के पहिए दिल्ली में प्रवेश से पहले ही फंस गए हैं और 25 हजार से ज्यादा व्यवसायिक वाहन दिल्ली में ही फंसे पड़े हैं।
ड्रोन, सीसीटीवी के जरिए निगरानी
किसानों के दिल्ली पहुंचने से पहले ही बॉर्डर पर लंबा जाम देखने को मिल रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। गुरुग्राम- दिल्ली नेशनल हाईवे पर सुबह 7 बजे से ही वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। ऐसा ही हाल गाजीपुर बॉर्डर पर भी देखा गया। यहां भी पुलिस ने लिंक सड़कों को बंद कर दिया है। वाहनों को दिल्ली में प्रवेश करने और बाहर निकलने के लिए दोनों कैरिजवे पर राजमार्ग पर केवल एक लेन की अनुमति दी। रजोकरी बॉर्डर के पास भी भारी ट्रैफिक जाम लग रहा है।












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