Exclusive: केजरीवाल के धरने से परेशान आम आदमी को खल रहा है 'नायक'

नई दिल्ली। एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सड़कों पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। नारेबाजी कर रहे हैं, भ्रष्ट प्रशासन और शासन के खिलाफ आवाज ऊंची कर रहे हैं। एक बार फिर से उन्होंने केन्द्र सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुंलद की है। झाड़ू लेकर वह मोर्चे पर उतर आये हैं लेकिन आज उनके नाम के आगे आम आदमी नहीं बल्कि दिल्ली के सीएम का तमगा लगा है।

आज वह जो कुछ भी कहते हैं और कर रहे हैं वह एक दिल्ली की सत्ता के मालिक को तौर पर देखा और सुना जा रहा है। जिन आम आदमी के लिए अरविंद केजरीवाल ने इतना शोर मचाया है वही आम आदमी आज उन्हें देखकर कन्फ्यूज हो गया है क्योंकि आज उसे ही इस धरने से परेशानी हो रही है।

दिल्ली की सड़कों पर केजरीवाल संग उमड़े जनसैलाब के कारण मैट्रो स्टेशन बंद हो गये हैं। लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही हैं। ऑटो वाले मनमानी किराया वसूल रहे हैं। धरने की वजह से यातायात के साधन बंद पड़े है लेकिन लोगों के ऑफिस, स्कूल और दुकानें तो खुली ही है इसलिए झक मारकर उन्हें वहां पहुंचना तो पड़ेगा ही। इसलिए आज सबसे ज्यादा आम आदमी ही केजरीवाल को धरने के लिए कोस रहा है।

दिल्ली की एक प्राईवेट कंपनी में काम करने वाली सारिका मिश्रा ने वनइंडिया से कहा कि कल से मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं। सीएम केजरीवाल के धरने की वजह से मैट्रो बंद हैं जिसकी वजह से मुझे ऑटो करके ऑफिस आना पड़ा वो भी दूने दाम में। टाइम खराब हुआ अलग... लौटते समय भी ऑटो से ही जाना पड़ेगा क्योंकि मैट्रो स्टेशन तक पहुंचने वाले रास्ते पर पुलिस ने बैरिकैटिंग लगा रखी है जिससे वहां पहुंचने में काफी समय लगेगा। समझ में नहीं आ रहा है कि केजरीवाल जैसे समझदार इंसान को क्या हो गया है?

ना तो पुलिस वाले सस्पेंड होंगे और ना ही होम मिनिस्टर साहब कुछ करेंगे लेकिन इतना जरूर है कि आज केजरीवाल के धरने की वजह से हम जैसे आम इंसान को काफी परेशानी हो रही है। यह कहां का नियम है कि एक मुसीबत का हल निकालने के लिए दूसरी दस मुसीबत खड़ी कर दो। अगर वाकई में अगले दस दिन तक केजरीवाल का धरना चला तो समझ लीजिये मेरी आधी कमाई तो केवल ऑटो के खर्चे में चली जायेगी। मुझे आज ऐसा लग रहा है कि कहीं मैंने आम आदमी पार्टी को वोट देकर गलत तो नहीं किया। आखिर धरना प्रदर्शन से ही अगर देश की व्यवस्था सही होती तो शायद अरविंद केजरीवाल को आज राजनीति में नहीं आना पड़ता लेकिन यह बात वह क्यों नहीं समझ रहे हैं, यह मेरी समझ के परे है।

तो देखा आपने कि एक आम आदमी की राय अरविंद केजरीवाल के बारे में क्या है? ऐसी और भी बातें हैं जो कि अरविंद केजरीवाल के धरने प्रदर्शन पर सवालिया निशान लगाती हैं।

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पहले भी सड़क पर आज भी सड़क पर...

पहले भी सड़क पर आज भी सड़क पर...

अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में आने का सबसे बड़ा कारण यही बताया था कि अनशन करने और धरना देने से आप सरकारी व्यवस्था को बदल नहीं सकते हैं इसलिए हम राजनीति में आ रहे हैं तो अब सीएम बनने के बाद अरविंद केजरीवाल धरने पर क्यों बैठ गये है। वह सीएम बनने से पहले भी सड़क पर थे और आज भी सड़क पर है।

केजरीवाल की वजह से प्यासी दिल्ली?

केजरीवाल की वजह से प्यासी दिल्ली?

अरविंद केजरीवाल के धरने से दूसरा सवाल पैदा होता है कि वह सड़क पर बैठकर किस तरह से दिल्ली की सरकार को चला सकते हैं। खुद वह कह रहे हैं कि वह सड़क पर बैठकर सीएम वाला काम कर रहे हैं। अगर ऐसा है तो आज पानी की समस्या को लेकर जो मीटिंग होने वाली थी उसे रद्द क्यों करना पड़ा जिसमें हरियाणा के सीएम भूपेंन्द्र सिंह हुड्डा भी शामिल होने वाले थे। अगर हरियाणा ने पानी देना बंद कर दिया तो दिल्ली वासी तो प्यासे मर जायेंगे?

अतिरिक्त सेनाबल..

अतिरिक्त सेनाबल..

धरने पर बैठे अरविंद केजरीवाल के साथ सैकड़ों लोग सड़क पर बैठे हैं जिनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और सेना को बुलाया गया है।अतिरिक्त सेना बल यानी अतिरिक्त आर्थिक बोझ.. एक खर्च बचाने के लिए केजरीवाल एक खर्च ज्यादा क्यों बढ़ा रहे हैं? आखिर जो पैसा खर्चा होगा वह भी आम जनता का ही है।

जवाबदेही किसकी?

जवाबदेही किसकी?

अरविंद केजरीवाल और उनके साथी दिल्ली की जनता से चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि उनके साथ आओ औऱ धरना दो। इतने सारी भीड़ को बेवजह इक्टठा करने की वजह क्या है? अगर खुदा ना खास्ता भगदड़ जैसी कोई अप्रिय घटना हो जाये तो इन सब का जिम्मेदार कौन होगा? क्या अरविंद केजरीवाल अपने जनता दरबार का हाल भूल गये हैं जो होममिनिस्टर मुख्यालय के सामने वह इस तरह की हरकत कर रहे हैं?

भटक गया मुद्दा या केजरीवाल?

भटक गया मुद्दा या केजरीवाल?

धरने से आज तक किसी भी व्यवस्था में परिवर्तन नहीं हुआ है। चाहे वह लोकपाल बिल हो या दिल्ली गैंगरेप के खिलाफ लोगों का गुस्सा... धरने और प्रदर्शन से केवल शोर मचाने के अलावा आज तक कुछ नहीं हुआ है। यह बाद खुद केजरीवाल भी जानते हैं तो फिर चार पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कराने के लिए इतना बड़ा कदम उठाने की वजह क्या है? क्या यह अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी का भटका हुआ कदम है या फिर कुछ और? आप लोगों का इस बारे में क्या सोचना है अपनी बात नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में जरूर दर्ज करायें।

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