निर्भया केस: डेथ वारंट से फांसी के तख्ते तक, फॉर्म-42 में लिखी होती है मौत की सजा की हर बात

डेथ वारंट में क्या होता है फॉर्म-42, जिसमें दोषियों को फांसी दिए जाने की एक-एक बात लिखी होता है...

नई दिल्ली। 2012 के दिल्ली गैंगरेप केस में आखिरकार निर्भया के दोषियों के लिए डेथ वारंट जारी हो गया है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को निर्भया केस में डेथ वारंट जारी करते हुए कहा कि चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी दे दी जाए। इस फैसले के बाद निर्भया की मां ने कहा कि आखिरकार उनकी बेटी को अब जाकर इंसाफ मिला है। उन्होंने कहा कि इन चारों दोषियों को फांसी की सजा मिलने से न्यायिक प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत होगा। डेथ वारंट जारी होने के बाद अब चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में तय तारीख और समय पर फांसी दे दी जाएगी। इस डेथ वारंट में एक फॉर्म नं- 42 होता है, जिमसें फांसी देने का पूरा ब्यौरा लिखा होता है।

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    जानिए, क्या होता है डेथ वारंट का फॉर्म-42

    जानिए, क्या होता है डेथ वारंट का फॉर्म-42

    'दोषी को तब तक गर्दन से फांसी पर लटकाया जाए, जब तक वह मर ना जाए', यह लाइन डेथ वारंट के इस फॉर्म नंबर 42 में ही दूसरे पैरा में लिखी होती है। दरअसल सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) के तहत फॉर्म-42 फांसी की सजा पाए किसी दोषी को फांसी पर लटकाने का आदेश होता है। फॉर्म-42 उस जेल के जेलर को संबोधित करते हुए जारी किया जाता है, जिस जेल में दोषियों को फांसी दी जानी है। इस फॉर्म की पहली ही लाइन में उन दोषियों के नाम लिखे होते हैं, जिन्हें फांसी पर लटकाया जाना है। इसके बाद इस फॉर्म में केस नंबर लिखा होता है।

    'दोषी को तब तक लटकाया जाए, जब तक वह मर ना जाए'

    'दोषी को तब तक लटकाया जाए, जब तक वह मर ना जाए'

    डेथ वारंट के फॉर्म-42 में इसके बाद उस तारीख का जिक्र किया जाता है, जिस दिन दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी होता है। इसके बाद दोषियों को फांसी दिए जाने की तारीख लिखी होती है। इसके अगले पैरा में लिखा होता है- 'दोषी को तब तक गर्दन से फांसी पर लटकाया जाए, जब तक वह मर ना जाए'। इसके बाद दोषियों को फांसी दिए जाने का समय और जगह लिखी होती है। फॉर्म-42 में सबसे नीचे की तरफ तारीख के साथ उस जज के हस्ताक्षर होते हैं, जो डेथ वारंट जारी करते हैं।

    कब जारी होता है डेथ वारंट

    कब जारी होता है डेथ वारंट

    आपको बता दें कि डेथ वारंट यानी ब्लैक वारंट, फांसी की सजा पाए किसी भी दोषी के खिलाफ उस वक्त जारी किया जाता है, जब न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो जाती है और दोषी की सभी अपील खारिज हो जाती हैं। ब्लैक वारंट जारी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक, जेल अधिकारी दोषियों और उनके परिजनों को फांसी के बारे में जानकारी देते हैं। इसके बाद दोषी की इच्छा पर उसके परिजनों के साथ उसकी मुलाकात कराई जाती है। इन सारी प्रक्रियाओं के बाद तय तारीख और तय समय पर दोषी को फांसी दे दी जाती है।

    फांसी के बाद वापस कोर्ट भेजा जाता है डेथ वारंट

    फांसी के बाद वापस कोर्ट भेजा जाता है डेथ वारंट

    फांसी देने के बाद जेल के डॉक्टर चेक करते हैं कि दोषी मर चुका है या नहीं। डॉक्टर की तरफ से दोषी की मौत की पुष्टि किए जाने के बाद जेल अधीक्षक ब्लैक वारंट पर अपने साइन करते हैं। इसके बाद डॉक्टर दोषी का डेथ सर्टिफिकेट जारी करता है और इस डेथ सर्टिफिकेट को ब्लैक वारंट के साथ कोर्ट वापस भेजकर बताया जाता है कि दोषी को फांसी दे दी गई है।

    आखिरकार निर्भया को मिला इंसाफ

    आखिरकार निर्भया को मिला इंसाफ

    गौरतलब है कि दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को अपने घर लौट रही 23 वर्षीय छात्रा से बस के अंदर गैंगरेप के मामले में 6 लोगों को दोषी ठहराया गया था। इस घटना के कुछ दिन बाद छात्रा की मौत हो गई और लोगों ने सड़कों पर उतरकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन किए। दोषी ठहराए गए 6 लोगों में से एक राम सिंह ने ट्रायल के दौरान तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी, जबकि एक दोषी नाबालिग था। हाल ही में हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप और उसे जलाकर मारने की घटना के बाद निर्भया के दोषियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाए जाने की मांग उठ रही है।

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