फिर अटकेगी इंडियन आर्मी के लिए अमेरिकी तोप एम777 की खरीद!

इंडियन आर्मी के लिए 145 हल्‍की हॉवित्‍जर तोप एम777 के लिए पांच हजार करोड़ की डील नाजुक मोड़ पर। रक्षा मंत्रालय डील पर फिर से विचार कर सकता है।

नई दिल्‍ली। भारत और अमेरिका के बीच 145 हॉवित्‍जर तोपों की पांच हजार करोड़ की डील काफी नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है। हालांकि अभी भी विशेषज्ञों को उम्‍मीद है कि भारत-अमेरिका के बीच यह डील अपने निर्णायक दौर में पहुंच सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच अगर यह डील होती है तो फिर भारत बोफोर्स डील के 30 वर्षों के बाद तोपों के लिए कोई डील करेगा।

रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को एम777 तोपों की फाइल को स्वीकृति दे दी है लेकिन इस डील पर आखिरी मुहर से पहले वित्‍त मंत्रालय की मंजूरी ली जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इस डील में कुछ बदलाव किए गए हैं।

भारत की ओर से हॉवित्‍जर एम777 की खरीद के लिए अमेरिकी सरकार को चिट्ठी भेजी गई थी। राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन ने इसे मंजूरी दी और फिर जून में डील की शर्तों को मंजूरी मिली।

ऑफसेट नीति के तहत भारत 25 तोपें तैयार हालत में लेगा और बाकी बीएई सिस्टम महिंद्रा के साथ साझेदारी के तहत भारत में तैयार करेगा।

यह डील वर्ष 2010 से ही रुकी हुई है और हर बार किसी न किसी वजह से डील को रोक दिया जाता है।

वर्ष 1980 के बाद से इंडियन आर्मी ने एक भी तोप नहीं खरीदी है। एक नजर डालिए हॉवित्‍जर गन एम777 अगर इंडियन आर्मी को मिलती है तो यह आर्मी और देश की सुरक्षा के लिए कितनी अहम साबित हो सकती है।

बोफोर्स के बाद नो डील

बोफोर्स के बाद नो डील

स्‍कैंडल ने डाला खरीद पर असर 30 वर्ष पहले जब बोफोर्स स्‍कैंडल ह‍ुआ उसके बाद भी इंडियन आर्मी को एक भी तोप नहीं मिल सकी थी। इस स्‍कैंडल ने आर्मी के लिए खरीदी जाने वाली हॉवित्‍जर गन की कई बड़ी डील्‍स को खासा प्रभावित किया।

क्‍या है खासियत

क्‍या है खासियत

हॉवित्जर गन्‍स दूसरी तोपों के मुकाबले काफी हल्की हैं। इनके निर्माण में टाइटेनियम का प्रयोग होता है। इस तोप की रेंज 25 किलोमीटर है।

चीन पर रहेगी नजर

चीन पर रहेगी नजर

भारत इन तोपों को 17 माउंटेन कॉर्प्स में तैनात कर सकता है। भारत की मंशा इन तोपों को अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में चीन से सटे 4,057 किमी स्थित एलएसी यानी लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल पर तैनात करने की है।

क्‍या है माउंटेन स्‍ट्राइक कॉर्प्‍स

क्‍या है माउंटेन स्‍ट्राइक कॉर्प्‍स

इन अमेरिकी तोपों को 17 माउंटेन स्‍ट्राइक कॉर्प्‍स के लिए लिया जा रहा है। 90,274 ट्रूप्‍स वाली इस कॉर्प्‍स पर 64,678 करोड़ की लागत आएगी और वर्ष 2021 में यह अस्तित्‍व में आ जाएगी।

जून 2006 में हुई डील

जून 2006 में हुई डील

जून 2006 में हॉवित्जर गन्‍स को खरीदने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत शुरू हुई। अगस्त 2013 में अमेरिका ने हॉवित्जर का नया वर्जन देने की पेशकश की जिसकी कीमत 885 मिलियन डॉलर थी।

भारत भी तैयार कर रहा है धनुष

भारत भी तैयार कर रहा है धनुष

भारत ने करीब दस वर्ष पहले जहां इन तोपों के लिए अमेरिका से मांग की थी। तो वहीं भारत बोफोर्स का अपग्रेडेड वर्जन धनुष नाम से तैयार करने में लगा हुआ है।

अमेरिका के साथ अब तक कितने की डील

अमेरिका के साथ अब तक कितने की डील

रूस को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका ने भारत के साथ वर्ष 2007 से अब तक 13 बिलियन डॉलर की डील्‍स कर डाली हैं

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