सास-ससुर की संपत्ति पर नहीं है बहू का जबरन हक़: दिल्ली हाईकोर्ट

- डॉमेसटिक वायलेंस के केस में जस्टिस ए के पाथक की बेंच ने अपने ताजा फैसले में कानूनी आधार पर कहा कि सास-ससुर की सेल्फ-एक्वायर्ड प्रॉपर्टी "शेयर्ड हाउसहोल्ड" की परिभाषा में शामिल नहीं है। बहू इस प्रॉपर्टी पर अपना दावा जबरन पेश नहीं कर सकती।
- हाईकोर्ट ने कहा कि यहां तक कि वयस्क बेटा या बेटी भी मां-बाप की इच्छा के खिलाफ उनकी संपत्ति पर कोई कानूनन अधिकार नहीं रखते। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, "बहू अपने सास-ससुर की उस संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रखती है जिस पर कि उसके पति को भी अधिकार न मिला हो।
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हाई कोर्ट एक बहू की ट्रायल कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुनवाई कर रहा था जिसमें उसने बहू को अपने नाराज ससुर को उनका मकान वापस करने के निर्देश दिए थे। मामले में बहू ने यह दावा किया था कि उसकी कानूनन शादी हुई है और इस नाते उसका अपने ससुर के घर में रहने का अधिकार है।
केस में ससुर ने कोर्ट में यह भी सबूत पेश किया कि उसने वर्ष 2010 में ही अपने बेटे को संपत्ति से बेदखअल कर दिया था और तब से वह उनसे अलग रहता है। जस्टिस पाठक ने कहा, "सभी तथ्यों को देखते हुए बहू का ससुर की इच्छा के खिलाफ उनकी अर्जित की गई संपत्ति पर बहू का जबरन अधिकार नहीं है।












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