तो इस नेता पर भरोसा कर कांग्रेस ने अपने विधायकों को भेजा बेंगलूरू
गुजरात में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले 6 विधायकों के इस्तीफे से परेशान कांग्रेस ने एक बार फिर संकटमोचक के रुप में डीके शिवाकुमार को याद किया है
नई दिल्ली। गुजरात में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले 6 विधायकों के इस्तीफे से परेशान कांग्रेस ने एक बार फिर संकटमोचक के रुप में डीके शिवाकुमार को याद किया है। कर्नाटक सरकार में उर्जा मंत्री डीके शिवाकुमार ने पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस को राजनीतिक संकट से बाहर निकालने का काम कर चुके हैं। पार्टी ने इस बार उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को राज्यसभा भेजे जाने तक गुजरात के कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने का काम सौंपा है। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने विधायकों को किसी और जगह भेजने की जगह बैंगलौर भेजा है जहां वे डीके शिवाकुमार की निगरानी में एकजुट रह सकेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक 55 वर्षीय डीके शिवाकुमार सिंगापुर में अपने परिवार के साथ छुट्टियां मना रहे थे तभी गुजरात कांग्रेस में बगावत हो गई। पार्टी ने इस संकट की घड़ी में शिवकुमार को याद किया और उन्हें 8 अगस्त को होने वाले राज्यसभा चुनाव तक विधायकों को एकसाथ रखने के लिए कहा गया।
कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार को बैंगलोर में डीके शिवाकुमार के छोटे भाई, डीके सुरेश के साथ मिलकर कांग्रेस विधायकों की रहने की वय्वस्था की। बता दें कि डीके शिवाकुमार के छोटे भाई, डीके सुरेश बैंगलोर ग्रामीण से कांग्रेस सांसद हैं और कांग्रेस विधायकों को जिस रिजार्ट में रखा गया है वो उनके ही संसदीय क्षेत्र में आता है। साथ ही यह रिजार्ट डीके शिवाकुमार के घर से सिर्फ 1 घंटे की दूरी पर है।
बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह हार के बाद डीके शिवाकुमार की कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर अहमियत तेजी से बढ़ी है। असम विधानसभा चुनाव में भी उन्हें अहम भूमिका दी गई थी। शिवकुमार पार्टी में अपने मानव प्रबंधन के लिए खासे डिमांड में रहते हैं। इस साल अप्रैल में उन्हें गंडलूपेट विधानसभा उपचुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी। इस उपचुनाव में कांग्रेस विजयी रही जबकि लिंगायत समुदाय के समर्थन के बावजूद भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था।












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