'राफ्ट पंचर थीं, लोग जैकेट पहन पानी में कूदे ताकि...', तूफान में बचे बर्ज के इंजीनियर ने सुनाई खौफनाक आपबीती

मुंबई, 20 मई: चक्रवाती तूफान तौकते महाराष्ट्र के तट से गुजर गया, लेकिन अपने पीछे तबाही का भयानक मंजर छोड़ गया है। इस तूफान की वजह से ही बर्ज P305 पानी में समा गया। जिसमें कम से कम 35 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हालांकि नौसेना और वायुसेना की कड़ी मेहनत के बाद समुद्र में काम कर रहे 700 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया। इस बीच बर्ज के चीफ इंजीनियर रहमान शेख ने एक नया दावा करते हुए कैप्टन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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    कैप्टन का अनुमान गलत

    कैप्टन का अनुमान गलत

    इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए चीफ इंजीनियर रहमान शेख ने कहा कि जहाज के कप्तान को एक हफ्ते पहले ही तूफान की चेतावनी मिल गई थी, लेकिन उन्होंने उसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके अलावा वहां पर मौजूद लाइफ राफ्ट्स में पंचर था। अगर इन दोनों चीजों पर ध्यान दिया गया होता तो इतने ज्यादा लोगों की मौत ना होती। उन्होंने कहा कि मैंने तूफान को लेकर कैप्टन बलविंदर सिंह से बात की थी। उस पर कैप्टन ने अंदाजा लगाया कि तूफान के दौरान हवा की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा नहीं होगी, लेकिन ये असल में 100 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा थी, जिस वजह से पांच एंकर टूट गए। चीफ इंजीनियर उन भाग्यशाली लोगों में से हैं, जिनको नौसेना की टीम ने रेस्क्यू कर लिया। फिलहाल वो अपोलो अस्पताल में इलाज करवा रहे, जबकि जहाज के कैप्टन अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

    रिंग से टक्कर के बाद छेद

    रिंग से टक्कर के बाद छेद

    आपको बता दें कि जो लोग ONGC के प्लेटफॉर्म और रिंग पर काम करते हैं, बर्ज उनके लिए आवासीय जहाज की तरह होता है। इसमें इंजन नहीं होता, जिस वजह से इसको एंकर के सहारे एक जगह पर टिकाया जाता है। वहीं जब किसी दूसरे जगह पर बर्ज को ले जाना रहता है, तो टग बोट का इस्तेमाल किया जाता है। शेख के मुताबिक उन्होंने आपातकालीन संदेश भेजा था, ताकि P305 टग बोट को बुलाया जा सके, लेकिन वो नहीं दिखा। हालांकि इलाके में कई नौसेना के जहाज देखे जा सकते थे, लेकिन जब तक वो वहां पर पहुंचते तब तक P305 मानवरहित तेल रिंग से टकरा गया, जिससे उसमें बड़ा सा छेद हुआ और पानी अंदर भरने लगा। इस पर उन्होंने लाइफ राफ्ट को पानी में फेंकना शुरू किया, लेकिन उसमें से दो ही लॉन्च हो पाए, बाकी 14 में छेद निकला।

    इस वजह से हुईं ज्यादातर मौतें

    इस वजह से हुईं ज्यादातर मौतें

    उन्होंने आगे बताया कि कुछ ही देर में तेज हवाएं चलने लगीं, जिस वजह से ऊंची लहरे उठ रही थीं। ऐसे में किसी की हिम्मत स्टारबोर्ड पर जाने की नहीं हुई, जहां पर 16 अन्य लाइफ राफ्ट रखी हुई थीं। इसके बाद जिन लोगों ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, उन्हें ग्रुप के साथ पानी में कूदने को कहा गया, ताकी रेस्क्यू टीम को वो दिख सकें। शेख के मुताबिक सोमवार 5 बजे के करीब बर्ज डूब गया। उस दौरान ज्यादातर लोगों की मौत पानी में रहने, घबराहट या फिर सदमे के कारण हुई। उन्होंने मौत को पास से देखा लेकिन वो अल्लाह की मेहरबानी से बच गए।

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