कोविड: कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस में बड़ी राहत, बीमा कंपनियों को सिर्फ इतनी देर में करना होगा क्लेम का निपटारा
नई दिल्ली, 30 अप्रैल: कोविड के कहर के बीच आईआरडीएआई की ओर से एक अच्छी खबर आई है। अब बीमा कंपनियां कोरोना से संबंधित कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस के निपटारे में अनावश्यक देर या टाल-मटोल नहीं कर पाएंगी। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बीमा कंपनियों से साफ कह दिया है, अस्पतालों से रिक्वेस्ट मिलते ही फौरन उसका निपटारा करें, ताकि मरीजों को इलाज से डिस्चार्ज करने में बेवजह की देरी ना हो। आईआरडीएआई की ओर से यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट के उस निर्देश के बाद आया है, जिसमें बीमा कंपनियों को कोविड से जुड़े क्लेम की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया गया था। बता दें कि इससे पहले खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी कैशलेस इंश्योरेंस को लेकर अस्पतालों और बीमा कंपनियों की टाल-मटोल की बात कही गई थी और उन्होंने रेगुलेटर को इसे फौरन ठीक करने को कहा था।

60 मिनट में दावों का करें निपटारा-आईआरडीएआई
आईआरडीएआई ने बीमा कंपनियों से कहा है कि कोविड से संबंधित दावों के मामले में दावेदारों की ओर से जरूरी कागजात मिलने के 60 मिनट या एक घंटे के अंदर उसकी मंजूरी सुनिश्चित करें। इस समय बीमा कंपनियां इस काम में 2 से लेकर कभी-कभी 4-4 घंटे का वक्त लगा देती हैं। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस निर्देश पर यह कदम उठाया है, जिसमें उससे इस प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया था, ताकि अस्पतालों के बेड जल्दी खाली हों और उसे तुरंत किसी दूसरे जरूरतमंद मरीजों को दिया जा सके। हाई कोर्ट ने गुरुवार को अपने आदेश में रेगुलेटर से कहा था कि बीमा कंपनियों को बता दें कि दावों को 30 से 60 मिनट के अंदर निपटाएं, जिससे मरीजों को डिस्चार्ज करने में अनावश्यक देरी ना हो और अस्पतालों में बेड बेवजह खाली ना पड़े रहें।
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कई अस्पतालों से मिल रही थी शिकायतें
आईआरडीएआई ने ये भी कहा है कि कोविड-19 के इलाज से संबंधित कैशलेस ट्रीटमेंट से संबंधित मंजूरी का फैसला भी अथॉराइजेशन रिक्वेस्ट मिलने के एक घंटे के अंदर पूरा करें। इसी तरह अस्पतालों से फाइनल बिल मिलने के एक घंटे के अंदर मरीज के कोविड-19 के कवर से संबंधित दावों का निपटारा करें। गुरुवार को आईआरडीएआई की ओर से जारी सर्कुलर में साफ कहा गया है कि कैशलेस इलाज की प्रक्रिया शुरू करने और डिस्चार्ज की प्रक्रिया तेजी से पूरा करने के लिए बीमा कंपनियों को अस्पतालों से मिलने वाले संदेशों पर समय-सीमा के अंदर कार्रवाई करनी होगी। इससे पहले ऐसी खबरें थीं कि नेटवर्क अस्पताल भी कैशलेस इंश्योरेंस वाले कोरोना मरीजों को लौटा रहे हैं। आईआरडीएआई ने भी कहा है कि कुछ नेटवर्क हॉस्पिटल की ओर से कोरोना मरीजों से कैशलेस इंश्योरेंस के बावजूद ज्यादा पैसे लेने की सूचनाएं मिली थीं और यह भी सूचना थी कि वह इंश्योरेंस के बावजूद कैश पेमेंट की मांग कर रहे थे।

केंद्र सरकार ने भी रेगुलेटर को दिए थे निर्देश
इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इंश्योरेंस रेगुलेटर आईआरडीएआई के चेयरमैन एससी कुनथिया से बीमा कंपनियों की ओर से क्लेम से इनकार करने की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा था। वित्त मंत्री ने कहा कि बीमा कंपनियों ने 9 लाख से ज्यादा कोविड संबंधित 8,642 करोड़ रुपये के दावों का निपटारा किया है। अपने कई ट्वीट में मंत्री ने कहा था कि 'कुछ अस्पतालों से कैशलेस इंश्योरेंस देने से इनकार करने की सूचनाएं हैं। आईआरडीएआई के चेयरमैन एससी कुनथिया से तुरंत कार्रवाई करने को कहा है। 20 मार्च को कोविड को कंप्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल किया गया। कैशलेस नेटवर्क या अस्थाई अस्पतालों में भी उपलब्ध है।'(तस्वीरें- सांकेतिक)












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