#MeToo: पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर के मानहानी मामले में कोर्ट ने सुनाया फैसला, महिला पत्रकार बरी
नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एमजे अकबर पर साल 2018 में मीटू अभियान के दौरान पत्रकार प्रिया रमानी ने शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री ने महिला पत्रकार पर मानहानि का मुकदमा दायर किया था। अब इस मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने पत्रकार प्रिया रमानी को बड़ी राहत दी है। राउज एवेन्यू की विशेष कोर्ट ने बुधावार को फैसला सुनाते हुए एमजे अकबर की याचिका को खारिज कर प्रिया रमानी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि महिला को दशकों के बाद भी अपनी शिकायत दर्ज कराने का पूरा अधिकार है।
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राउज एवेन्यू की विशेष कोर्ट का फैसला पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर के लिए बड़ा झटका है। कोर्ट ने मानहानि मामले में ना सिर्फ पत्रकार प्रिया रमानी को बरी कर दिया बल्कि अकबर की याचिका को भी खारिज कर दिया है। कोर्ट ने प्रिया रमानी को कोर्ट ने आपराधिक मानहानि का दोषी नहीं माना। बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि शोषण बंद दरवाजे के पीछे होता है, कोर्ट ने इस बात पर भी संज्ञान लिया है कि ऐसे मामलों में शिकायतें करने के लिए तंत्र की कमी है। शोषण की शिकार महिलाएं अक्सर कलंक और चरित्रहनन के डर से आवाज नहीं उठा पातीं।
रमानी ने दायर की थी याचिका
बता दें कि साल 2019 में प्रिया रमानी ने एमजे अकबर द्वारा दायर किए गए केस में खुद पर से आरोप हटाने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मी टू अभियान के तहत उन्होंने आरोप लगाया था कि 21 साल पहले अकबर ने उनका यौन शोषण किया था। हालांकि अकबर ने खुद पर लगे आरोपों से इनकार किया था। तीन साल पहले 17 अक्टूबर 2018 को इन आरोपों के चलते उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
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