Coronavirus की जांच में आ सकती है बड़ी मुश्किल, सिर्फ 3 लाख किट ही बची है
नई दिल्ली- देश में कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग में टेस्टिंग बढ़ाने पर हर एक्सपर्ट जोर दे रहे हैं और सरकार की भी कोशिश है रोजाना स्तर पर ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग की जाए। लेकिन, नोवल कोरोना वायरस की जांच में काम आने वाली आरएनए एक्सट्रैक्शन किट्स का स्टॉक खत्म होने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक इस किट का जितना स्टॉक रह गया है, उससे सिर्फ एक हफ्ते का ही काम चल सकता है। हालांकि, सरकारी सूत्रों की ओर से बताया जा रहा है कि 30 लाख किट के ऑर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं और उम्मीद है कि उनकी जल्द डिलिवरी से यह समस्या वक्त रहते दूर कर ली जाएगी। बता दें कि रविवार दोपहर बात तक कोरोना वायरस पॉजिटिव केसों की संख्या बढ़कर 26,496 हो चुकी थी, जबकि 824 लोगों की जान भी जा चुकी थी।

आरएनए एक्सट्रैक्शन किट्स का स्टॉक कम
केंद्र सरकार की योजना है कि कोरोना वायरस से संक्रमितों की जांच के लिए रोजाना 1 लाख सैंपलों की जांच हो, लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि फिलहाल देश में सिर्फ 3 लाख आरएनए एक्सट्रैक्शन किट ही बच गए हैं। मौजूदा समय में रोजाना 38,000 सैंपलों की जांच हो रही है, उस हिसाब से जितने किट बच गए हैं, वह मुश्किल से एक हफ्ते तक ही चलेंगे। बता दें कि कि आरटी-पीसीआीर टेस्ट (RT-PCR test) के लिए सैंपल तैयार करने के लिए हर टेस्ट के लिए एक आरएनए किट की दरकार होती है। मुश्किल ये है कि टेस्टिंग किट की ये किल्लत वैसे समय में आई है, जब भारी खामियां पाए जाने के बाद रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट को पहले ही रोका जा चुका है।

30 लाख आरएनए एक्सट्रैक्शन किट जल्द मिलने की संभावना
बता दें कि आरएनए एक्सट्रैक्शन किट नोवल कोरोना वायरस में मौजूद आएनए निकालता है, जिसका इस्तेमाल आरटी-पीसीआर टेस्ट में होता है। यह टेस्ट वायरस में मौजूद आरएनए की रचना का पता लगाता है, जिससे कि उसमें मौजूद वायरस की पहचान हो सके। भारत में इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए टीबी टेस्टिंग मशीनों के इस्तेमाल की भी योजना बनाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, 'हमारे पास करीब 3 लाख आरएनए एक्सट्रैक्शन किट हैं, टेस्ट की मौजूदा दर के हिसाब से यह एक हफ्ते के लिए काफी है। हम इसे जल्द से जल्द मंगवाना चाहते हैं और विभिन्न वेंडरों को इसके ऑर्डर दे दिए गए हैं। हमें कम से कम 30 लाख आरएनए एक्सट्रैक्शन किट और 10 लाख वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम किट मिलने की उम्मीद है और इसकी सप्लाई जल्द शुरू होने की संभावना है। दिक्कत ये है कि आरटी-पीसीआर किट का इस्तेमाल आरएनए एक्सट्रैक्शन किट के बिना हो ही नहीं सकता। '

रोजाना 1 लाख टेस्ट करवाने की है योजना
मध्य प्रदेश जैसे राज्य पहले ही आरएनए आरएनए एक्सट्रैक्शन किट की किल्लत को लेकर हाथ खड़ कर दिए हैं। बता दें कि इस महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को बताया था कि वह 31 मई तक टेस्टिंग की क्षमता को 1 लाख टेस्ट प्रतिदिन तक ले जाने की योजना बना रहा है। लेकिन, अगर पहले ही आरएनए एक्सट्रैक्शन किट किट की कमी हो गई तो उसकी सारी योजनाएं धरी की धरी रह जाने की आशंका है। बता दें कि हाल ही में आईसीएमआर ने एक एडवाइजरी जारी कर सभी राज्यों से कहा था कि वह एक नोडल ऑफिसर को तैनात करें जो दिल्ली में मौजूद राज्यों के रिजिडेंट कमिश्नरों के साथ इस तरह की खरीदारी और सप्लाई को लेकर तालेमल बिठा सकें। आईसीएमआर कह चुका है कि उसकी ओर से सर्टिफाइड लैब्स ही वीटीएम और आएनए एक्सट्रैक्शन किट राज्यों के माध्यम से खरीदेंगे।

रोजाना 1 लाख पीपीई और एन95 का देश में ही उत्पादन
इस बीच शनिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन की अगुवाई में हुई मंत्रियों के समूह ने कोरोना वायरस से लड़ाई को लेकर तैयारियों की समीक्षा की। इसमें मंत्री समूह को बताया कि देश में रोजाना 1 लाख पीपीई और एन95 मास्क बन रहे हैं। इस समय 104 घरेलू कंपनियां पीपीआई बना रही हैं और 2 एन95 मास्क बना रहे हैं। इनके अलावा घरेलू निर्माओं ने वेंटिलेटरों का उत्पादन भी शुरू कर दिया है और 9 निर्माताओं को 59,000 यूनिट के ऑर्डर दिए जा चुके हैं।












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