BHU के साइंटिस्ट का दावा, अगले तीन महीने में आएगी कोरोना की तीसरी लहर लेकिन होगी कम घातक
नई दिल्ली, सितंबर 14। देश में कोरोना की तीसरी लहर का खतरा लगातार मंडरा रहा है। एक्सपर्ट अब तीसरी लहर के आने की बात सितंबर के महीने में कह रहे हैं, लेकिन इस बीच बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)के प्रोफेसर ने दावा किया है कि कोरोना की तीसरी लहर अगले तीन महीने में कभी भी आ सकती है। हालांकि उन्होंने ये जरूर कहा है कि तीसरी लहर ज्यादा घातक नहीं होगी।
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तीसरी लहर में बच्चे होंगे अधिक संक्रमित!
BHU में जीव विज्ञान विज्ञाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा है कि कोरोना की तीसरी पिछली लहर के मुकाबले कम घातक होगी। साथ ही ये लहर उन लोगों को अधिक प्रभावित नहीं करेगी, जो या तो वैक्सीन ले चुके हैं, या फिर कोरोना संक्रमित रह चुके हैं। हालांकि ज्ञानेश्वर चौबे ने ये जरूर कहा कि तीसरी लहर में बच्चे सेफ नहीं होंगे, उनपर संक्रमण का खतरा बहुत अधिक है। चौबे ने कहा कि बच्चे कोरोना की तीसरी लहर के दौरान संरक्षित समूह के अंतर्गत आएंगे।
तीसरी लहर के खिलाफ वैक्सीनेशन सबसे बड़ा हथियार
प्रोफेसर चौबे ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए वैक्सीनेशन सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने कहा, 'चूंकि हर तीन महीने में एंटीबॉडी का स्तर गिरता है, इसलिए तीसरी लहर की संभावना है। अगर अगले तीन महीने में एंटीबॉडी का स्तर गिरता है तो तीसरी लहर आ सकती है। लेकिन चल रहे टीकाकरण अभियान से वायरस के खिलाफ लड़ाई में मदद मिलेगी। यदि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता 70 प्रतिशत से अधिक है तो उस समूह पर कोविड-19 का प्रभाव कम होगा और धीरे-धीरे इसकी आवृत्ति कम होने लगेगी। हमें यही देखना है।'
मृत्यु दर पर काबू पाना ही कोरोना से जीत
चौबे ने आगे यह भी कहा कि वायरस को रोका नहीं जा सकता, लेकिन मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 'समय-समय पर, कोरोना चरम पर होगा, लेकिन यह फिर कम हो जाएगा। एक बार एंटीबॉडी का स्तर कम हो जाने पर, कोविड -19 होने की संभावना बढ़ जाएगी। फिर भी, संरक्षित समूह के लोगों के लिए, मृत्यु दर बहुत कम है।' उन्होंने कहा कि मृत्यु दर को कम रखना ही कोरोना के खिलाफ जीत है।












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