'बंद कीजिए इनकी कथा', अनिरुद्धाचार्य ने क्या कहा ऐसा कि भड़क गए लोग? जानिए पूरा मामला
Aniruddhacharya Ji Maharaj: प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने भगवान कृष्ण और भगवान शिव पर अपनी हालिया टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया है। उनके बयान से संतों में काफी गुस्सा है, जिसके चलते मथुरा में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अनिरुद्धाचार्य की टिप्पणी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर निरंजनी अखाड़े के संतों ने एसएसपी कार्यालय पर प्रदर्शन किया।
शनिवार को निरंजनी अखाड़े के संतों ने एसएसपी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने भगवान कृष्ण के बारे में विवादित टिप्पणी करने वाले अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा है। परमज्ञान आश्रम के संतों ने उनके कथावाचन सत्रों पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है।

संतों का नेतृत्व कर रहे प्रवेशानंद पुरी ने इस टिप्पणी पर अपना आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से सनातन धर्म से जुड़े लोगों की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने कहा, "अतीत में भी हमारे धर्म का अपमान करने के लिए इसी तरह की टिप्पणियां की गई हैं।"
आखिर क्या कह दिया है अनिरुद्धाचार्य ने
अनिरुद्धाचार्य के बयान में कहा गया है कि चूंकि भगवान कृष्ण का विवाह उज्जैन में हुआ था, इसलिए भगवान शिव कृष्ण के साले हैं। इस टिप्पणी को कई लोगों ने आपत्तिजनक माना है, क्योंकि यह धार्मिक ग्रंथों के विपरीत है। संतों का मानना है कि इस तरह के बयान उनकी मान्यताओं की पवित्रता का उल्लंघन करते हैं।
संतों ने सनातन संस्कृति का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति का विरोध करने की कसम खाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अनिरुद्धाचार्य की कथावाचन को जल्द ही बंद नहीं किया गया तो वे अपना विरोध और तेज कर देंगे। उन्होंने कहा, "हमारी संस्कृति का अपमान करने वालों का हर संभव विरोध किया जाएगा।"
बढ़ा विवाद, तो मांगी माफ़ी
बहरहाल, अनिरुद्धाचार्य ने संत समाज से माफी मांगते ली है। उन्होंने कहा कि अगर संतों द्वारा जो बात कही जा रही है मैंने इस तरह की कोई बात नहीं कही है. यदि मेरी वाणी से संतों का दिल दुखा है तो मैं उन संतो के चरणों में अपना मस्तक रखकर करोड़ों बार क्षमा प्रार्थना करता हूं। उन्होंने साथ में जोड़ा कि हम आपके बच्चे हैं गलती तो बच्चे ही करते हैं और मेरी वाणी से किसी भक्त का संतो का दिल दुखा हो, तो मैं उनसे करोड़ों-करोड़ों बार क्षमा प्रार्थी हूं।












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