संविधान बदलने में कांग्रेस का क्या रिकॉर्ड है, कितनी बार किया संशोधन?
Amendment of Indian Constitution: संविधान में समय और आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन करना भी भारतीय संविधान का ही हिस्सा है। संविधान के अनुच्छेद 368 में ही इसमें संशोधन की भी व्यवस्था भी की गई है और संविधान लागू होने के बाद से अबतक 106 बार संविधान संशोधन हो चुके हैं, जिनमें से अधिकतर देश और देश के नागरिकों की बेहतरी के लिए ही हुए हैं।
लेकिन, सवाल इसलिए उठता है कि कई बार हुए संविधान में बदलाव का मकसद पूरी तरह से राजनीतिक समझा गया है। कई बार तो इस तरह के संशोधन हुए हैं, जिसमें संविधान की आत्मा को ही पूरी तरह से बदलने के गंभीर आरोप लगते हैं।

संविधान बदले जाने के दावे के पीछे का सच?
उदाहरण के लिए संविधान का 42वां संशोधन का नाम लिया जा सकता है, जिसे 'मिनी कॉन्स्टिट्यूशन' के नाम से भी जानते हैं। 18वीं लोकसभा के चुनाव में विपक्ष ने नरेंद्र मोदी सरकार पर संविधान बदलने की मंशा का आरोप लगाकर अभियान चलाया और माना जा रहा है कि उसमें विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक को काफी फायदा भी हुआ है।
संविधान की 'रक्षा' करने का दावा कर रही है कांग्रेस
विपक्ष की ओर से इस तरह का प्रचार किया गया कि बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए 400 से ज्यादा सीटें इसलिए जीतना चाहता है ताकि संविधान बदलकर आरक्षण की व्यवस्था को खत्म कर सके।
18वीं लोकसभा के पहले दिन भी कांग्रेस की अगुवाई वाला विपक्ष 'संविधान की रक्षा' वाले अपने दावे के ट्रैक पर नजर आया और सदन के अंदर से लेकर संसद परिसर तक में संविधान की कॉपियां दिखाकर खुद को संविधान के कथित 'संरक्षक' के तौर पर पेश करने की कोशिश की।
'कांग्रेस ने 80 बार बदला देश का संविधान'
लोकसभा चुनावों के दौरान जब कांग्रेस समेत विपक्षी दल एनडीए और भाजपा के खिलाफ संविधान बदलने की मंशा वाला आरोप लगा रहे थे, तब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह तथ्य सामने रखा था कि असल में कांग्रेस के शासनकाल में ही 80 बार देश का संविधान बदला जा चुका है।
नेहरू के कार्यकाल में 17 बार बदला संविधान
हमने केंद्रीय मंत्री के दावे की पड़ताल शुरू की तो लाइवमिंट की एक रिपोर्ट से पता चला की भारतीय गणतंत्र के पहले 14 वर्षों में ही देश का संविधान 17 बार बदल दिया गया था। यह कार्यकाल कांग्रेस नेता और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का था।
42वें संशोधन में इंदिरा सरकार ने संविधान की प्रस्तावना ही बदल डाला
हमने अपनी पड़ताल आगे बढ़ाई। नेहरू की बेटी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पहले से ही 42वें संविधान संशोधन के लिए कुख्यात हैं। इसमें इतने सारे बदलाव किए गए थे कि इसे 'छोटा संविधान' ही कहा जाने लगा। भारतीय संविधान के 74 वर्षों के इतिहास में यही ऐसा एकमात्र संशोधन है, जिसमें संविधान की प्रस्तावना के साथ भी 'छेड़छाड़' किया गया।
'इंदिरा गांधी के शासनकाल में 40 बार बदला संविधान'
इसी संशोधन के माध्यम से प्रस्तावना में 'समाजवाद' और 'धर्मनिरपेक्ष' जैसे शब्द जोड़े गए। जबकि, संविधान निर्माताओं ने कभी इसकी आवश्यकता महसूस नहीं की थी। झारखंड की पूर्व डीजीपी निर्मल कौर के एक ताजा लेख के अनुसार इंदिरा गांधी के शासनकाल में 40 बार से ज्यादा संविधान को बदलने का प्रयास हुआ।
राजीव गांधी के कार्यकाल में 11 बार संशोधन
इंदिरा गांधी के दुखद निधन के साथ ही सत्ता की बागडोर अचानक उनके बड़े बेटे राजीव गांधी को सौंप दी गई। उनके कार्यकाल में भी कम से कम 11 बार संविधान में संशोधन किया गया। कुख्यात शाह बानो केस में सर्वोच्च अदालत का फैसला पलटना भी उनके कार्यकाल के इतिहास में दर्ज है।
यूपीए सरकार में भी कम से कम 6 बार हुआ संशोधन
कांग्रेस नेता राहुल गांधी संविधान की कॉपी लेकर लोकसभा चुनावों के समय से चल रहे हैं। चुनाव के परिणाम आने के बाद भी वह संविधान की कॉपी साथ में रख रहे हैं और उसकी 'रक्षा' करने के दावे करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। जबकि, हकीकत ये है कि उनके कांग्रेस सांसद रहते हुए भी मनमोहन सिंह के दोनों कार्यकालों में कम से कम 6 बार संविधान संशोधन हुए।
इस दौरान वे खुद कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे और बाकी समय उनकी मां सोनिया गांधी के पास पार्टी की कमान रही। कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ बाकी संविधान संशोधन उस दौर का है, जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे।












Click it and Unblock the Notifications