हिंदी, परिसीमन और '₹' के चक्कर में कैसे फंस गई कांग्रेस? पार्टी के सामने खड़ी हुई 3 बड़ी मुश्किल
Congress News: कांग्रेस पार्टी इन दिनों तीन बड़े राजनीतिक मुद्दों- तीन भाषा नीति (Three language policy), परिसीमन (delimitation) और '₹' (रुपया) प्रतीक चिन्ह को लेकर सियासी तौर फंसती हुई नजर आ रही है। इन तीनों मसलों पर कांग्रेस का स्टैंड राष्ट्रीय स्तर पर विरोधाभासी प्रतीत हो रहा है, जिससे पार्टी को हिंदी बेल्ट में चुनावी नुकसान हो सकता है।
क्योंकि, ये तीनों ऐसे मुद्दे हैं,जो अभी राष्ट्रीय राजनीति में छाए हुए हैं और तीनों ही मुद्दों पर तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस और राष्ट्रीय कांग्रेस (AICC) की रणनीति अलग-अलग है। जहां तमिलनाडु कांग्रेस तीनों ही मुद्दों पर पूरी तरह से सत्ताधारी डीएमके (DMK) के स्टैंड के सामने सरेंडर करती दिख रही है, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी की बोलती अबतक पूरी तरह से बंद है। इसको लेकर फिलहाल कांग्रेस पार्टी के सामने खड़ी दिख रहीं तीन चुनौतियों को देख लेते हैं।

Congress Tamil Nadu: 1. तीन भाषा नीति पर कांग्रेस की दुविधा
तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने अपने बजट लोगो में रुपए के '₹' प्रतीक चिन्ह को हटाकर तमिल अक्षर का उपयोग किया, जिसे कथित रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत हिंदी थोपने के खिलाफ उसके विरोध के रूप में देखा जा रहा है।
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष के सेल्वापेरुनथगई ने स्टालिन सरकार के इस कदम का पूरा समर्थन किया है, जबकि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
डीएमके (DMK) लंबे समय से हिंदी विरोधी राजनीति करती रही है, लेकिन कांग्रेस का इस स्टैंड के साथ जाना उत्तर भारत में उसकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
आंध्र प्रदेश जैसे कुछ दक्षिण भारतीय राज्य भी सरकारी स्तर पर तीन-भाषा नीति (Three language policy) का समर्थन कर रहे हैं, जिससे कांग्रेस की स्थिति और जटिल हो गई है।
Congress News: 2. '₹' प्रतीक चिन्ह का विरोध करके अजीब हो रही कांग्रेस की स्थिति
2010 में मनमोहन सिंह सरकार ने ही भारतीय मुद्रा के लिए '₹' प्रतीक चिन्ह को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया था। अब डीएमके के इस प्रतीक के विरोध पर प्रदेश कांग्रेस का समर्थन करना एक उलझन भरा फैसला है।
जब '₹' कांग्रेस के शासनकाल में ही लाया गया था, तो अब इसे हटाने का समर्थन करके पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
यह मुद्दा कांग्रेस की आर्थिक नीतियों और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति उसके रुख को लेकर एक नई बहस को जन्म दे सकता है।
हिंदी भाषी क्षेत्रों में कांग्रेस पर यह आरोप लगाया जा सकता है कि वह केवल डीएमके की राजनीति का अनुसरण कर रही है, बजाय एक स्वतंत्र नीति अपनाने के।
Congress Party: 3. परिसीमन और कांग्रेस का असमंजस
परिसीमन को लेकर भी कांग्रेस के भीतर स्पष्ट विभाजन दिख रहा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, जो स्वयं कर्नाटक से हैं, इस मुद्दे पर सीधे मोदी सरकार के खिलाफ खड़े हो गए हैं। उनका मानना है कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ अन्याय होगा, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। यही लाइन तमिलनाडु कांग्रेस भी ले रही है।
कांग्रेस के इस रुख से हिंदी बेल्ट में यह धारणा बन सकती है कि वह उत्तर भारत के खिलाफ खड़ी हो रही है, जिससे पार्टी को राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
परिसीमन की स्थापित व्यवस्था का विरोध करना उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ा सकता है, जहां लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ सकती हैं।
Congress News: फिर क्या करे कांग्रेस?
इस तरह से कांग्रेस इस समय एक अजीब राजनीतिक दुविधा में फंसी हुई है। हिंदी भाषा, '₹' प्रतीक चिन्ह और परिसीमन पर उसका रुख अलग-अलग राज्यों में अलग दिख रहा है, जिससे पार्टी की राष्ट्रीय एकता और स्पष्टता पर सवाल उठ सकते हैं।
यदि कांग्रेस हिंदी भाषी राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहती है, तो उसे डीएमके के हिंदी विरोधी एजेंडे से खुद को अलग करना होगा।
'₹' प्रतीक चिन्ह के मुद्दे पर पार्टी को अपने पुराने फैसलों के अनुरूप ही रहना चाहिए, जिससे उसकी विश्वसनीयता बनी रहे।
परिसीमन पर कांग्रेस को एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, जिससे वह दक्षिण और उत्तर दोनों क्षेत्रों में समर्थन बनाए रख सके।












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