कांग्रेस MP सिंघवी बोले-अमेरिका की तरह भारत में भी सांसद को हो बिल पेश करने अधिकार

नई दिल्‍ली। कांग्रेस नेता और सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने शनिवार को एक वेबीनार में संसदीय लोकतंत्र की अहमियत पर कई बातें कहीं। कांग्रेस सांसद और सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने अधिवक्‍ता ने लोकतंत्र को किसी देश का आधार करार दिया है। उन्‍होंने कहा कि संविधान, लोकतंत्र का एक महत्‍वपूर्ण स्‍तंभ है। उन्‍होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में संसद एक बड़ा स्‍तंभ है। चुनाव आयोग, विधायिका, न्‍यायपालिका और सेना लोकतंत्र के दूसरे अहम हिस्‍से हैं। उन्‍होंने वेबीनार में संसदीय प्रक्रिया में सुधार के कई सुझाव भी दिए।

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अब खत्‍म होती जा रही है खूबसूरती

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को आजादी होती है कि वह किसी बात से असंतुष्‍ट हो सके, असहज हो सके और किसी की बात से असहमति जता सके। उन्‍होंने कहा कि यह बहुत ही आश्‍चर्यजनक बात है कि आज के दौर में भारत अभी तक एक विभिन्‍न पहलुओं वाला लोकतंत्र बना हुआ है। इसकी कोई एक वजह नहीं है बल्कि कई बातें हैं जो भारत को एक रंग-बिरंगा लोकतंत्र बनाती हैं। उन्‍होंने महात्‍मा गांधी और पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु को देश की विविधताओं से भरे लोकतंत्र का श्रेय दिया। उन्‍होंने कहा कि इन दोनों के संयोजन से ही आज भारत का लोकतंत्र इतने अलग-अलग स्‍वरूपों में विद्यमान है। उन्‍होंने कहा कि क्‍या आप कल्‍पना कर सकते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मनमोहन सिंह को फोन करके उन्‍हें पीएम बनने की बधाई दी होगी? अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यही तो भारत के लोकतंत्र की खूबसूरती है जो अब सिमटती जा रही है। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय स्‍तर पर एक ऐसे घटनाक्रम हो रहे हैं जिन्‍हें रोकना अब जरूरी हो गया है।

व्हिप में दिया सुधार का प्रस्‍ताव

अभिषेक मनु सिंघवी ने इसके साथ ही संसद के कई महत्‍वपूर्ण कार्यों के बारे में बताया जिसमें कानून बनाने से लेकर प्रशासन के काम काज के तरीकों को तय करना शामिल है। उन्‍होंने कहा कि भविष्‍य का रोडमैप तैयार करना भी संसद का ही काम है। इसके साथ ही उन्‍होंने संसद में सुधार को लेकर अपने आइडियाज भी शेयर किए जिसमें पहला था सांसदों को बिल का प्रस्‍ताव देना। उन्‍होंने कहा कि सिर्फ सरकार के पास ही बिल पेश करने की ताकत है। ऐसे में वो सांसद हैं जिनके पास कोई बेहतर ड्राफ्ट है, वह बाकी बिल के आगे बौना साबित हो जाता है। उनका कहना था कि अमेरिका की तरह भारत में सांसद के पास भी संसद में बिल पेश करने की आजादी होनी चाहिए। उनका कहना था कि व्हिप भी एक प्रकार प्रतिबंध है और इसमें बदलाव की जरूरत है। उन्‍होंने व्हिप कभी-कभी सांसद की क्रिएटिविटी को खत्‍म करता। ऐसे में इसे कुछ ही केसेज तक सीमित रखना चाहिए जैसे वित्‍त बिल और विश्‍वास प्रस्‍ताव जैसे बड़े मौके। इसके साथ ही उन्‍होंने सांसदों के दल-बदलने की प्रवृत्ति को भी खत्‍म करने के लिए सुधार की मांग की। उन्‍होंने इस दौरान सन् 1985 में आए दल-बदल कानून का जिक्र भी किया।

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