OIC मुद्दे पर मनीष तिवारी ने मोदी सरकार को घेरा बोले, 56 इंच सपाट हो गई
नई दिल्ली। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जिस तरह से पाकिस्तान के विरोध के बीच ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन की बैठक में विशिष्ट अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया उसके बाद इस मसले पर लगातार सियासी बयानबाजी जारी है। दरअसल ओआईसी की ओर से कश्मीर मुद्दे पर भारत अधिकृत कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा गया कि भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद की मुख्य वजह कश्मीर है। साथ ही ओआईसी ने की ओर से जारी बयान में कहा गया कि आतंकी कमांडर बुरहान वानी की हत्या को फर्जी एनकाउंटर करार दिया और कश्मीर में भारतीय आतंकवाद का जिक्र किया। ओआईसी की ओर से जारी इस बयान पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

56 इंच सपाट हो गई
कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार ने दावा किया है कि ओआईसी में भारत को न्योता दिया जाना हमारी कूटनीतिक सफलता है, लेकिन जिस तरह से ओआईसी ने भारत के खिलाफ पाक का समर्थन किया है उसने 56 इंच की छाती को सपाट कर दिया है। ओआईसी ने अपने प्रस्ताव में कहा कि जिस तरह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत को बातचीत का प्रस्ताव दिया और शांति के संदेश के तहत भारतीय पायलट को रिहा किया। ओआईसी ने कहा कि दोनों ही देशों को आपसी तनाव कम करना चाहिए। साथ ही पाकिस्तान का समर्थन करते हुए ओआईसी ने भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के एयरस्पेस का उल्लंघन गलत है और पाक को पूरा अधिकार है कि वह खुद की रक्षा करे।

पीएम मोदी पर साधा निशाना
मनीष तिवारी ने कहा कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अबू धाबी में ओआईसी की बैठक में हिस्सा लिया, एनडीए-भाजपा की सरकार ने इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर पेश किया था कि भारत को इस बैठक में न्योता दिया गया था। लेकिन अबू धाबी में जो हुआ वह भारत के लिए सही नहीं है। तिवारी ने कहा कि कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से पूछना चाहती है कि क्या यह भारत की कूटनीतिक जीत है। बता दें कि सुषमा स्वराज भारत की पहली विदेश मंत्री हैं जिन्होंने ओआईसी की बैठक को संबोधित किया।

पाक ने किया था विरोध
बता दें कि ओआईसी की ओर से भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को विशेष अतिथि के तौर पर न्योता दिया गया था। ओआईसी में सुषमा स्वराज को न्योता दिए जाने के खिलाफ पाकिस्तान ने कड़ा विरोध किया था। पाकिस्तान ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लेने का फैसला लिया था। पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस बैठक में जाने से इनकार कर दिया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भारत ने इस बैठक में हिस्सा लेकर ओआईसी को मान्यता दे दी है, यही नहीं ऐसाा करके भारत ने देश के हितों से समझौता किया है।

भारत के लिए शर्मिंदगी
मनीष तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार ने ओआईसी में भारत के हिस्सा लेने को बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर लोगों के सामने पेश किया, लेकिन यह भारत के लिए शर्मिंदगी साबित हुआ है। ओआईसी ने अपने प्रस्ताव में ना सिर्फ कश्मीर में भारत के आतंकवाद की निंदा की बल्कि कश्मीर को भारत द्वारा कब्जे वाला बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र हितों के मूद्दे पर आत्मसमर्पण का हम कड़ी शब्दों में निंदा करते हैं।
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