Congress Manifesto: चुनाव में कांग्रेस को क्यों दिखाना पड़ा गाजा पर दर्द? घोषणापत्र की ये बातें कर रहीं इशारा
Lok Sabha Election 2024 Congress Manifesto: कांग्रेस पार्टी ने 48 पन्नों के अपने चुनावी घोषणापत्र में देश-विदेश के ज्यादातर पहलुओं को छूने की कोशिश की है। लेकिन, इसकी कुछ बातें बहुत ही दिलचस्प हैं और लगता है यह खास वोट बैंक को प्रभावित करने के इरादे से उठाई गई हैं। इसी में से एक मुद्दा 'गाजा पट्टी' को लेकर अपनाई गई भारत सरकार की नीति का विरोध।
कांग्रेस पार्टी के घोषणापत्र में कहा गया है कि आजादी के बाद से देश में विदेश नीति पर आम सहमति होती थी। लेकिन, दुर्भाग्य ये है कि बीजेपी-एनडीए सरकार के कार्यकाल में इसमें परिवर्तन आ गया। इस परिवर्तन के रूप में पार्टी ने खास तौर पर गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष का जिक्र किया है।

गाजा पट्टी पर कांग्रेस दर्द के मायने?
इजरायल अभी भारत का करीबी सहयोगी है। वहां पर हमास के आतंकवादियों ने जिस तरह से दरिंदगी को अंजाम दिया था, उसके बाद ही इजरायल ने गाजा पट्टी में बदले की कार्रवाई शुरू की।
लेकिन, जिस तरह से देश में कट्टरपंथी मुसलमानों ने गाजा पट्टी में इजरायली कार्रवाई के खिलाफ छाती पीटना शुरू किया और हमास के आतंकियों को स्वतंत्रता सेनानी साबित करने के लिए जोर लगाया, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
देश में कुछ राजनीतिक दलों ने खासकर वामपंथी पार्टियों ने सिर्फ एक वोट बैंक को खुश करने के लिए दूसरे देश में हो रही इस जंग में हमास आतंकवावादियों की करतूतों पर पर्दा डालने की कोशिशों का समर्थन किया। कांग्रेस के घोषणापत्र से भी उसी वोट बैंक को खुश करने की कोशिश नजर आ रही है।
कथित असहिष्णुता और कथित मानवाधिकारों के दमन का दर्द!
इसी तरह से कांग्रेस का दावा है कि देश में कथित असहिष्णुता का वातावरण है और कथित धार्मिक स्वतंत्रता समेत मानवाधिकारों का दमन किया गया है, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय छवि खराब हुई है, जिसे वह सुधारने की कोशिश करेगी। कांग्रेस के इस वादे में भी उसी खास वोट बैंक को खुश करने की कोशिश नजर आ रही है।
नफरती भाषणों और सांप्रदायिकता के खिलाफ कहां सख्त है कांग्रेस?
इसके बाद कांग्रेस की ओर से वादा किया गया है कि वह नफरत भरे भाषणों, नफरत भरे अपराधों और सांप्रदायिक विवादों को सख्ती से खत्म करेगी। कांग्रेस अगर अपने इस वादे के प्रति ईमानदार है तो कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में खुद उसके अपने और उसके सहयोगियों के नेताओं ने, यहां तक कि मंत्रियों पर भी कट्टर और बेहद नफरती भाषणों के आरोप लगे हैं, जो बहुसंख्यकों की धार्मिक भावना भड़काने वाले माने जा रहे हैं।
'बुलडोजर न्याय' से कांग्रेस को क्यों है दिक्कत?
इसी तरह से कांग्रेस पार्टी ने मॉब लिंचिंग, फर्जी एनकाउंटर और 'बुलडोजर न्याय' जैसे कथित गैर-न्यायिक कदमों को तुरंत रोकने का वादा किया है। किसी राज्य सरकार ने जब भी ऐसे कदम उठाए हैं तो वह अदालतों के संज्ञान में भी लाए जा चुके हैं। जहां आवश्यक हुआ है कोर्ट ने उसमें दखल भी दिया है।
ऐसे में लगता है कि 'बुलडोजर न्याय' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके कांग्रेस एक खास वोट बैंक का सहानुभूति तो नहीं बटोरना चाह रही है?












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