'नया संसद भवन आरामदायक नहीं', जयराम रमेश ने गिनाई कमियां, तो जेपी नड्डा ने किया पलटवार

हाल ही में संपन्न हुआ संसद का विशेष सत्र नए भवन में आयोजित किया गया था। वैसे तो नई संसद में सभी हाईटेक व्यवस्था हैं, लेकिन कांग्रेस नेता और सांसद जयराम रमेश को ये पसंद नहीं आई। इसके लिए उन्होंने ट्विटर पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिख डाला। जिस पर बीजेपी चीफ जेपी नड्डा ने पलटवार किया है।

जयराम रमेश ने लिखा कि इतने प्रचार के साथ लॉन्च किया गया नया संसद भवन वास्तव में पीएम के उद्देश्यों को अच्छी तरह से साकार करता है। इसे 'मोदी मल्टीप्लेक्स' या 'मोदी मैरियट' नाम दिया जाना चाहिए। चार दिनों के बाद मैंने देखा कि दोनों सदनों के अंदर और लॉबी में बातचीत खत्म हो गई थी। अगर वास्तुकला लोकतंत्र को मार सकती है, तो संविधान को दोबारा लिखे बिना भी प्रधानमंत्री पहले ही सफल हो चुके हैं।

 JP Nadda

उन्होंने आगे लिखा कि नए भवन में एक-दूसरे को देखने के लिए दूरबीन की जरूरत होती है, क्योंकि हॉल बिल्कुल आरामदायक या कॉम्पैक्ट नहीं हैं। पुराने संसद भवन की ना केवल एक विशेष आभा थी बल्कि ये बातचीत की सुविधा भी प्रदान करता था। सदनों, सेंट्रल हॉल और गलियारों के बीच चलना आसान था, लेकिन नए भवन में ऐसा नहीं है।

कांग्रेस नेता के मुताबिक पुरानी इमारत में अगर आप खो गए थे, तो आपको अपना रास्ता फिर से मिल जाएगा, क्योंकि ये गोलाकार था। नई इमारत में अगर आप रास्ता भूल जाते हैं, तो आप भूलभुलैया में खो जाते हैं। पुरानी इमारत आपको जगह और खुलेपन का एहसास देती है जबकि नई इमारत लगभग क्लौस्ट्रफोबिक है।

उन्होंने आगे कहा कि संसद में बस घूमने का आनंद गायब हो गया है। मैं पुरानी बिल्डिंग में जाने के लिए उत्सुक रहता था, लेकिन नए कॉम्प्लेक्स में ऐसा नहीं है। मैंने सचिवालय के कर्मचारियों से ये भी सुना है कि नए भवन के डिजाइन में उनके लिए आवश्यक जरूरतों का ध्यान नहीं दिया गया। ऐसा तब होता है जब भवन का उपयोग करने वाले लोगों के साथ कोई परामर्श नहीं किया जाता है। शायद 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद नए संसद भवन का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

नड्डा ने क्या कहा?

उनके इस पोस्ट पर जेपी नड्डा ने पलटवार किया। उन्होंने उसे रिट्वीट कर कांग्रेस पार्टी के निम्नतम मानकों के हिसाब से भी ये एक दयनीय मानसिकता है। ये 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं के अपमान के अलावा और कुछ नहीं है। वैसे भी, ये पहली बार नहीं है जब कांग्रेस संसद विरोधी हुई है। उन्होंने 1975 (इमरजेंसी के वक्त) में कोशिश की और वो बुरी तरह विफल रही।

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