कैसे तार-तार हो रहा INDIA bloc? कांग्रेस का लोकसभा चुनावों वाला बुलबुला फूटा!
कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में 10 साल बाद नेता विपक्ष का पद क्या मिला, उसके हौसले बुलंदियों को छूने लगे थे। लोकसभा की 543 सीटों में से 99 सीटों पर जीतने के बाद पार्टी सांसद राहुल गांधी के पांव जमीन पर नजर नहीं आ रहे थे। कांग्रेस को इस स्थिति में लाने में यूपी,महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों का बड़ा योगदान था। लेकिन,जब से पार्टी की इन्हीं राज्यों में फिर से मिट्टी पलीद हुई है, उसके पीछे इंडिया ब्लॉक के नाम से एकजुट हुआ विपक्ष बिखरने लगा है।
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी सिर्फ कहने को इंडिया ब्लॉक के साथ रही, ममता बनर्जी ने वहां कांग्रेस और लेफ्ट को कभी कोई भाव नहीं दिया। अब जब कांग्रेस को हरियाणा, महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है तो ममता विपक्षी गठबंधन को लीड करना चाह रही हैं। यूपी में तो उपचुनाव में उसे सपा ने 9 में से एक भी सीट चुनाव लड़ने को नहीं दिया।

अडानी मुद्दे पर भी टीएमसी-एनसीपी (एसपी) ने छोड़ा कांग्रेस का साथ
इससे पहले से ही टीएमसी और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने अडानी मुद्दे पर संसद में कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन की रणनीतियों से खुद को दूर कर लिया था। महाराष्ट्र में इंडिया ब्लॉक का ही गठबंधन महा विकास अघाड़ी हारा है तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और सीपीआई ने भी कांग्रेस को 'आत्मचिंतन' का ज्ञान देना शुरू कर दिया है।
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महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन को सपा ने दिय झटका
महाराष्ट्र में तो समाजवादी पार्टी के कांग्रेस की अगुवाई वाले एमवीए गठबंधन से हटने के फैसले ने तो इसके अघोषित सुप्रीमो राहुल गांधी के मंसूबों पर और पानी फेर दिया है। दरअसल, सपा उद्धव ठाकरे के करीबी मिलिंद नार्वेकर के एक पोस्ट को पचा नहीं पा रही है।
उन्होंने एक्स पर बाबरी मस्जिद की एक तस्वीर डाली थी, उसके साथ ही 1992 में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की पंक्तियां जोड़ी थीं, जिसमें उन्होंने मस्जिद गिराए जाने पर गर्व की बात कही थी।
शिवसेना (यूबीटी) के सामने आगे कुआं, पीछे खाई वाली स्थिति?
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि 'ऐसे पोस्ट टाले जा सकते हैं, लेकिन गठबंधन में ऐसे वैचारिक विरोधाभास स्वाभाविक हैं।' शिवसेना (यूबीटी) में विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद मची खलबली के बारे में उन्होंने कहा, 'हम सबको हार झेलनी पड़ी है...लेकिन मैं नहीं जानता....शायद शिवसेना (यूबीटी) सोच रही है कि उन्हें हिंदुत्व की ओर लौट जाना चाहिए। लेकिन, अभी तक हमनें इसके कोई ठोस संकेत नहीं देखे हैं।'
कांग्रेस को इंडिया ब्लॉक के बने रहने की उम्मीद!
इसे मजबूरी कहें या फिर राजनीति की वास्तविकता, कांग्रेस के नेताओं ने अभी तक उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'हमने लोकसभा चुनावों में बीजेपी से लड़ने के लिए इंडिया अलायंस बनाया था। हमारी लड़ाई जारी है।
लेकिन, राज्यों में कुछ दल एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते हैं। केरल में हम सीपीएम से लड़ते हैं,बंगाल में सीपीएम और कांग्रेस टीएमसी से लड़ती है, दिल्ली में हम आप से लड़ सकते हैं, सबकुछ सामने है। वैचारिक मतभेद भी हैं, लेकिन बड़ा लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी से लड़ना है।'
सिर्फ मीडिया में रह गया है इंडिया ब्लॉक- सपा नेता
कांग्रेस चाहे जो भी सोच रही हो, लेकिन जिस सपा के भरोसे यूपी में लोकसभा चुनावों में उसे 1 से बढ़कर 6 सीटें मिली हैं, उसको लगता है कि इंडिया ब्लॉक अब मोटे तौर पर 'सिर्फ मीडिया में रह गया है।'वहीं सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहना शुरू कर दिया है कि जब सीट-शेयरिंग की बात आती है तो गठबंधन की बड़ी पार्टियां लेफ्ट को नजरअंदाज कर देती हैं। वे भी कांग्रेस को आत्ममंथन की नसीहत दे रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) पहले ही अपने मुखपत्र सामना के संपाकदीय में लिख चुका है, 'पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी कांग्रेस को दूर रखकर राजनीति की कोशिश कर रही हैं। अब केजरीवाल भी उसी रास्ते चल पड़े हैं। यह ऐसा मामला है, जहां कांग्रेस आत्मचिंतन करे और (विपक्षी)एकता के लिए कदम उठाए।'
ममता के तेवर से कांग्रेस की बढ़ी चुनौती
ममता ने जिस तरह से इंडिया ब्लॉक की अगुवाई करने में दिलचस्पी दिखाई है, उसपर कांग्रेस आधिकारिक टिप्पणी करने से भी परहेज कर रही है। वैसे पार्टी के एक नेता ने कहा, 'संसद में इंडिया ब्लॉक की पार्टियों के सदन के नेताओं की बैठकों में टीएमसी नहीं पहुंच रही थी। जब हमने उनसे पूछा तो उनके नेताओं ने कहा कि टीएमसी इंडिया ब्लॉक में नहीं है। और फिर ममता कहती हैं कि वह गठबंधन की अगुवाई के लिए तैयार हैं।'
वे बोले, 'कांग्रेस इस पर कोई राय या टिप्पणी नहीं कर सकती। ये सारे मुद्दे गठबंधन में उठाए जाएंगे।'इंडिया ब्लॉक में शामिल कुछ और दल भी इसपर टीका-टिप्पणी से बच रहे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी को ममता के बयान में कोई भी आपत्ति नहीं नजर आती।
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सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने उस अखबार को कहा, 'ममता बनर्जी जी एक वरिष्ठ नेता हैं और हम उनके नेतृत्व और संघर्ष से संतुष्ट हैं। हमें कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन, यह इंडिया ब्लॉक के नेताओं की ओर से तय होगा। हम चाहेंगे कि वह गठबंधन में ज्यादा सक्रिय और अच्छी भूमिका निभाएं। हमें कोई आपत्ति नहीं है।'
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