वोट पाने के लिए नहीं लाए 'सांप्रदायिक हिंसा बिल'

Communal Violence Bill not a vote-catching gimmick: PM
नई दिल्‍ली। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना है कि 'सांप्रदायिक हिंसा बिल' वोट पाने के लिए नहीं लाया जा रहा है बल्कि मुजफ्फरनगर दंगे जैसे हालात फिर न बने इसलिए हम यह बिल ला रहे हैं। गौर हो कि भाजपा और कई गैर कांग्रेसी दल इस बिल का विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का कहना है कि अगर यह बिल पास हो जाता है तो दंगें रोंकने में मदद मिलेगी, साथ ही प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बिल को सर्वसम्‍मति से ही पारित किया जाएगा।

मनमोहन ने कहा कि हमने पिछले पांच छह वर्षों में देखा कि देश के अलग अलग हिस्‍सों में सांप्रदायिक हिंसा की वारदातें हुई हैं। ऐसे में बिल को लाने के हमारे दो प्रमुख उद्देश्‍य हैं एक तो किसी भी संवेदनशील स्थिति में कानून व्‍यवस्‍था को बनाए रखना और अगर इसे रोंका न जा सके तो कम से कम इसके शिकार लोगों को जल्‍द से जल्‍द राहत देना।

उनका वक्‍तव्‍य ऐसे समय में आया जब भाजपा और एआईडीएमके जैसी पार्टियां इसके कई प्रावधानों पर विरोध कर रही हैं। मनमोहन सिंह के अनुसार इसे 'वोट पाने की कोशिश' के तौर पर नहीं बल्कि 'आपदा से निपटने के नुस्‍खे' के तौर पर देखा जाना चाहिए। इसे लेकर गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने पहले ही कह दिया है कि हम 'सांप्रदायिक और लक्षित हिंसा रोकथाम बिल' को संसद के शीतकालीन सत्र में लाकर रहेंगे।

बिल में प्रयुक्‍त शब्‍दों पर भी विपक्षी दलों ने आपत्ति की थी और कहा था कि इसमें 'माइनॉरिटी' और 'मेजारिटी' जैसे शब्‍दों का इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए क्‍योंकि ऐसा होने से यह किसी एक समुदाय के खिलाफ दिखने लगता है। बिल के प्रावधान कि राज्‍य में हिंसा की संभावना पर केंद्र राज्‍य सरकार की बिना सहमति के वहां फोर्स भेज सकती है, पर भी सरकारों को ऐतराज है।

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