Collegium System:CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल में कॉलेजियम में 5 की जगह 6 सदस्य क्यों होंगे? जानिए
Collegium of Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में आमतौर भारत के प्रधान न्यायाधीश समेत 5 सदस्य होते हैं। लेकिन, 9 नवंबर,2022 से नए सीजेआई के तौर पर कार्यभार संभाल चुके जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में सदस्यों की संख्या 6 होगी। सर्वोच्च न्यायालय की परंपरागत सामान्य व्यवस्था में यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के ही एक पुराने आदेश की वजह होना है। यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की वजह से करना होगा, जिसके तहत कॉलेजियम में कम से कम एक सदस्य ऐसा होना चाहिए, जो देश का अगला सीजेआई बन सकता है।

सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ के कॉलेजियम में 6 सदस्य होंगे
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाले कॉलेजियम में सामान्य परंपरा के मुताबिक उनके अलावा जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एस अब्दुल नजीर, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस आर शाह शामिल होने चाहिए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के इन चारों न्यायाधीशों में से कोई भी जस्टिस चंद्रचूड़ के उत्तराधिकारी नहीं बनने वाले हैं। क्योंकि, ये सारे जज जस्टिस चंद्रचूड़ के कार्यकाल खत्म होने, यानि 10 नवंबर, 2024 से पहले ही रिटायर हो जाएंगे। इसलिए, 1998 के 'तीन जजों' के फैसले के मुताबिक, सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ को अपने कॉलेजियम में जस्टिस संजीव खन्ना को भी शामिल करना होगा, जिनके 2024 में जस्टिस चंद्रचूड़ की जगह उनके उत्तराधिकारी बनने की संभावना है।
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1998 का सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला है वजह
दरअसल, सामान्य प्रक्रिया के तहत 11 नवंबर, 2024 को जस्टिस संजीव खन्ना के ही नए सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ के उत्तराधिकारी के तौर पर कार्यभार संभालने की संभावना है, जो उनकी जगह कॉलेजियम की भी कमान संभालेंगे। इसलिए नए कॉलेजियम में सदस्यों की संख्या सामान्य तौर पर अगले करीब दो साल तक 6 सदस्यों की होने वाली होगी। बता दें कि 1998 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, '.....हमें लगता है कि ये वांछनीय है कि कॉलेजियम में भारत के प्रधान न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल हों।' लेकिन, उस फैसले में इसके साथ ही एक विशेष संभावना की बात भी बताई गई थी, जो परिस्थितियां अगले कॉलेजियम के साथ पैदा हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने पहले ही कर ली थी कल्पना
सुप्रीम कोर्ट के तब के फैसले के मुताबिक, 'सामान्यतया, सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम अवर न्यायाधीशों में से एक भारत के प्रधान न्यायाधीश का कार्यभार संभालेंगे, लेकिन यदि स्थिति ऐसी हो,जिसमें उत्तराधिकारी चीफ जस्टिस चार वरिष्ठतम अवर न्यायाधीशों में शामिल नहीं हों, तो उन्हें निश्चित तौर पर निरपवाद रूप से कॉलेजियम का हिस्सा बनाया जाएगा। जिन जजों की नियुक्ति होगी, वह उनके कार्यकाल में काम करेंगे और इसलिए यह सही है कि उनके चयन में उनका हाथ होना चाहिए।' सुप्रीम कोर्ट के ज्ञानी जजों ने जिन हालातों को कल्पना 24 साल पहले ही कर ली थी, वही परिस्थितियां आ गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट में चार जजों के पद खाली हैं
मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में जजों के 34 स्वीकृत पदों में से चार पद खाली हैं। वैसे, पूर्व सीजेआई यूयू ललित की अगुवाई वाले कॉलेजियम ने 26 सितंबर को ही बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दिपांकर दत्ता को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर बहाल करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार भेजा हुआ है। उनकी नियुक्ति के लिए वारंट ऑफ अपॉइन्टमेंट जल्द ही जारी होनी की संभावना है।

एससी में 17 जजों की नियुक्ति कर सकेगा अगला कॉलेजियम
मंगलवार यानि 9 नवंबर, 2022 से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई में जो 6 सदस्यीय कॉलेजियम कार्य करेगा, उसे उनके दो साल का कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट के करीब 17 जजों को नियुक्त करने का मौका मिलेगा, जो कि सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए स्वीकृत पदों की संख्या का आधा है। जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर, 2024 तक अगले कॉलेजियम की अगुवाई करेंगे।












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