जानिए क्यों नीतीश कुमार ने कहा-अपने बाप से पूछो, अपनी माता से पूछो...
पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। राजनीतिक दल लगातार एक दूसरे के खिलाफ आऱोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। मृदुभाषी माने जाने वाले सीएम नीतीश कुमार इस बार चुनाव में आनी भाषाशैली को लेकर चर्चा में हैं। इन दिनों नीतीश का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वे तेजस्वी यादव के खिलाफ बोल रहे हैं। लेकिन उनकी भाषा सुनकर सभी हैरान हैं। तेजस्वी पर सवाल खड़े करते हुए नीतीश वीडियो में कह रहे हैं कि, अगर पढ़ना चाहते हो तो अपने बाप से पूछो अपनी माता से पूछो कि कहीं कोई स्कूल था, कहीं कोई स्कूल बन रहा था।
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शनिवार को बेगुसराय ज़िले के तेघडा विधानसभा में अपने भाषण के दौरान सीएम नीतीश कुमार एक बार फिर भाषा की मर्यादा भूल गए...उन्होंने आरजेडी शासन काल का जिक्र करते हुए कहा, 'जब लोगों को मौका मिला तो क्या किए, एक स्कूल बनाया था?' तेजस्वी यादव का नाम लिए बिना कहा, "अगर पढ़ना चाहते हो तो अपने बाप से पूछो अपनी माता से पूछो कि कहीं कोई स्कूल था, कहीं कोई स्कूल बन रहा था, कहीं कोई कॉलेज बन रहा था?
नीतीश कुमार ने कहा कि, ज़रा पूछ लो...राज करने का मौक़ा मिला तो ग्रहण करते रहे और जब अंदर चले गए, तो पत्नी को बैठा दिया गद्दी पर। इसके बाद वीडियो में नीतीश कुमार अपने कामों का बखान करते दिखे। दरअसल नीतीश कुमार तेजस्वी के 10 लाख नौकरियों वाले दांव से घबराएं हुए हैं। नीतीश की भाषा शैली को लेकर फेसबुक पर तेजस्वी यादव ने लिखा कि मुख्यमंत्री मानसिक व शारीरिक रूप से थक चुके है। लोकतंत्र में जीत-हार चलती रहती है। वो हार देखकर घबराए नहीं और भाषा की शालीनता और मर्यादा को बनाए रखे।
मनोज झा ने कहा कि, नेता प्रतिपक्ष हमेशा आप कहकर ही संबोधित करते हैं लेकिन नीतीश कुमार अब भाषाई मर्यादा भूल गए हैं। वे अब तू तड़ाक की राजनीति कर रहे हैं। बिहार में ऐसी भाषा के लिए कोई जगह नहीं। झा ने कहा कि हम पाॅजिटिव कैंपेन करना चाहते हैं लेकिन जदयू और भाजपा की यह कोशिश है कि बिहार के मुद्दे पर कैंपेन ही न हो। उन्होंने कहा कि बिहार परिवर्तन चाहता है। न सिर्फ सरकार बदलने के लिए बल्कि सरोकार बदलने के लिए भी।












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