अध्यादेश पर केंद्र के खिलाफ अपनी रणनीति में कामयाब होते दिख रहे केजरीवाल, ये है अभी तक का समीकरण
अरविंद केजरीवाल लगातार विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर रहे। अब तक उनको 10 पार्टियों का समर्थन मिल चुका है।

केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने मोर्चा खोल रखा है। उनकी रणनीति अब सफल होती नजर आ रही, क्योंकि अच्छी संख्या में उनको विपक्षी दलों का साथ मिल गया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही कि केंद्र सरकार इस अध्यादेश को राज्यसभा में आसानी से नहीं पास करवा पाएगी।
पिछले कुछ हफ्तों से सीएम केजरीवाल देशव्यापी अभियान पर हैं। उन्होंने कई विपक्षी नेताओं, विपक्षी दलों के प्रमुखों और तमिलनाडु, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात की। अब तक उन्हें करीब 10 प्रमुख विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त हुआ है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक केजरीवाल ने तीन मोर्चों पर इस लड़ाई को लड़ा और तीनों में वो कामयाब होते नजर आ रहे। पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई जीती, इसके बाद वो सड़कों पर उतरे। तो वहीं अब वो संसद के अंदर के लिए एक रणनीति तैयार कर रहे।
वहीं दूसरी ओर बीजेपी के पास लोकसभा में बहुमत तो है, लेकिन राज्यसभा में उसके पास सदस्यों की संख्या कम है। ऐसे में बिना दूसरी पार्टियों की मदद वो इसे उच्च सदन में पास नहीं करवा सकती है। सीएम केजरीवाल तो इस लड़ाई को 2024 के चुनाव का सेमीफाइनल घोषित कर चुके हैं।
अब तक अरविंद केजरीवाल को टीएमसी, डीएमके, शिवसेना (उद्धव गुट), जेडीयू, आरजेडी, झामुमो और सपा समेत 10 विपक्षी दलों का समर्थन मिल चुका है। आइए देखते हैं कि किस विपक्षी पार्टी के पास राज्यसभा में कितने सदस्य हैं-
| पार्टी | राज्यसभा में सीट |
| टीएमसी | 12 |
| डीएमके | 10 |
| बीआरएस | 7 |
| आरजेडी | 6 |
| जेडीयू | 5 |
| सीपीआई (एम) | 5 |
| एनसीपी | 4 |
| शिवसेना (उद्धव गुट) | 3 |
| समाजवादी पार्टी | 3+1 |
| जेएमएम | 2 |
वहीं आम आदमी पार्टी के खुद राज्यसभा में 10 सदस्य हैं। अगर उनको आरएलडी और सीपीआई का समर्थन मिल गया, तो वो 71 सदस्यों का समर्थन जुटा सकते हैं।
हालांकि इस बिल को राज्यसभा में रोकने के लिए AAP को कांग्रेस की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए मई में केजरीवाल ने कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात की कोशिश की थी, लेकिन दोनों से समय नहीं मिल पाया।
मौजूदा वक्त में कांग्रेस के राज्यसभा में 31 सांसद हैं। अगर उसने AAP को समर्थन दे दिया, तो इस बिल का राज्यसभा में पास होने मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल पार्टी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रही।












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