सीएम गहलोत ने राज्यपाल की शर्तों को किया अस्वीकार, कहा-सत्र बुलाना सरकार का हक है

नई दिल्ली। राजस्थान में पिछले कई दिनों से चल रहे सियासी ड्रामे के बीच आज गहलोत सरकार की कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें राज्यपाल की शर्तों पर विधानसभा का सत्र चलाने के आदेश को स्वीकार नहीं किया गया है। राजस्थान कैबिनेट ने एक बार फिर राज्यपाल को विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा है। कहा गया है कि राज्यपाल को कैबिनेट की सलाह माननी होती है, वरना संवैधानिक संकट होगा। कैबिनेट राज्य़पाल की शर्तों को स्वीकार नहीं करेगी।

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    राज्यपाल को फिर भेजा गया सत्र बुलाने का प्रस्ताव

    राज्यपाल को फिर भेजा गया सत्र बुलाने का प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर हुई बैठक के बाद मीडिया के साथ बातचीत में मंत्री हरीश चौधरी ने कहा कि सरकार 31 जुलाई को विधानसभा का सत्र बुलाना चाहती है, न कि 21 दिन का नोटिस जारी करने के बाद। बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि विधानसभा सत्र बुलाना सरकार का हक है। उन्होंने कहा कि, राज्‍यपाल कलराज मिश्र द्वारा उठाई गई तीनों आपत्तियां कैबिनेट को मंजूर नहीं हैं।

     विधानसभा सत्र बुलाना हमारा हक:गहलोत

    विधानसभा सत्र बुलाना हमारा हक:गहलोत

    मंत्री हरीश चौधरी ने कहा कि 21 दिन का नोटिस देना सरकार का अधिकार है, राज्‍यपाल का नहीं। विधानसभा बुलाना सरकार का हक है। राज्‍यपाल विधानसभा अध्‍यक्ष के काम में हस्‍तक्षेप ना करें। उन्होंने राज्‍यपाल से अनुरोध करते हुए कहा कि सरकार का काम सरकार को और अध्‍यक्ष का काम अध्‍यक्ष को करने दें। मंत्री ने यह भी कहा कि गवर्नर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार ही काम करें। सरकार के पास बहुमत है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से अबतक दो बार राज्यपाल कलराज मिश्र को विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा गया है। दो बार राज्यपाल ने इसे वापस भेज दिया है।

    राज्यपाल ने संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन किया: गहलोत

    राज्यपाल ने संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन किया: गहलोत

    कैबिनेट की बैठक के बाद राजस्थान सरकार ने राज्यपाल को अवगत कराया कि उन्हें मंत्रिमंडल द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को अस्वीकार करने का अधिकार नहीं है। गहलोत सरकार ने यह भी बताया कि विधानसभा सत्र बुलाने के प्रस्ताव पर सहमत नहीं होने के कारण, राज्यपाल ने संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन किया। उधर कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान सरकार गिराने की कोशिश और संवैधानिक कार्यालयों के दुरुपयोग के खिलाफ रविवार को एक राष्ट्रव्यापी अभियान स्पीक अप फॉर डेमोक्रेसी आयोजित किया। पार्टी के अनुसार, यह अभियान पूरे भारत में टॉप पर ट्रेंड करता रहा।

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