राजनीतिक पार्टियों को टैक्स में छूट पर मंत्रालय ने दी सफाई
अशोक लवासा की घोषणा के बाद कई लोगों में एक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी, जिस पर वित्त मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया है।
नई दिल्ली। शुक्रवार को वित्त सचिव अशोक लवासा ने कहा था कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत राजनीतिक पार्टियों को अपने खातों में कैश जमा करने की छूट है, जिसके उन्होंने कुछ शर्तें भी बताई थीं।

अशोक लवासा की इस घोषणा के बाद कई लोगों में एक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी, जिस पर वित्त मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया है। वित्त मंत्रालय ने इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है कि राजनीतिक दलों के खाते में जमा होने वाले पुराने नोटों की जांच नहीं होगी।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि लोगों में भ्रम पैदा हुआ है, क्योंकि इनकम टैक्स की धारा 13ए के तहत राजनीतिक दलों को आयकर छूट मिली हुई है। वित्त मंत्रालय की तरफ से कुछ अखबारों की खबरों का खंडन करते हुए इनकम टैक्स कानून को लेकर स्पष्टीकरण दिया है।
1- इनकम टैक्स के तहत सिर्फ उन्हीं दलों को छूट मिलती है जो चुनाव आयोग में पंजीकृत होते हैं। वित्त मंत्रालय ने यह साफ किया कि इनकम टैक्स अधिनियम के सेक्शन 13ए के मुताबिक अगर किसी राजनीतिक पार्टी को यह छूट चाहिए होती है तो उसे पहले अपने बैंक खातों का पूरा अकाउंट और दस्तावेज पेश करने होते हैं।
2- हर राजनीतिक दल को 20 हजार से अधिक राशि के चंदे का रिकॉर्ड रखना होता है। साथ ही, हर पार्टी को चंदा देने वाले का नाम और पता भी नोट करना होता है, तभी हासिल होने वाली रकम पर छूट हासिल होगी।
3- चुनाव आयोग में पंजीकृत हर पार्टी के खातों का किसी चार्टर्ड अकाउंटेट से ऑडिट होना भी जरूरी है।
4- इसके साथ ही हर राजनीतिक पार्टी को एक निश्चित समय सीमा के अंदर ही उन्हें मिले चंदे का ब्योरा चुनाव आयोग के सामने पेश करना होता है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक राजनीतिक दलों के खातों की जांच करने के लिए इनकम टैक्स ऐक्ट में कई प्रावधान हैं। इसके अलावा इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने समेत अन्य नियम भी राजनीतिक दलों पर लागू होते हैं।












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