छत्तीसगढ़ को अगले 2 साल में नक्सल मुक्त बनाने का दावा, लेकिन उठ रहे हैं सवाल
Chhattisgarh Naxal Problem Story: छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद नक्सलियों के खिलाफ लगातार बड़ी सफलताएं मिल रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि अगले कुछ सालों में नक्सल समस्या को पूरी तरह समाप्त कर दिया जायेगा। नक्सल उन्मूलन की दिशा में तेजी से बढ़ते कदम के दावे के बीच विपक्ष के अपने सवाल हैं,जो काफी हद तक सोचने के लिए मजबूर भी करते हैं।
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने हाल ही में विधानसभा में बताया था कि दिसंबर 2024 से जून 2024 के बीच राज्य इस अवधि के दौरान 273 नक्सली घटनाएं हुईं, जिनमें सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच 92 मुठभेड़ शामिल हैं। नक्सली घटनाओं और मुठभेड़ में 19 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और 88 जवान घायल हुए, जबकि 34 माओवादियों को मार गिराया गया है। यह आकंडे स्पष्ट करते हैं कि नक्सल मोर्चे पर भले ही सुरक्षाबलों ने पूरी मजबूती से मोर्चा संभालकर रखा हुआ है,लेकिन जंगलों में माओवादी अब भी सक्रिय हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने हाल ही में विधानसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ से नक्सल समस्या के खात्मे की गारंटी दी थी। वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने जनता से वादा किया था कि देश में नक्सलवाद की समस्या अगले दो-तीन साल में खत्म हो जाएगी। सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई वाली भाजपा की सरकार नक्सलवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह चुकी हैं।

सूबे के मुखिया विष्णु देव साय ने का कहना है कि उनकी सरकार पिछले छह महीनों से पूरी ताकत से नक्सलवाद से लड़ रही है और उम्मीद है कि वामपंथी उग्रवाद का मुद्दा तीन साल के भीतर हल कर लिया जाएगा। विष्णुदेव साय ने हाल ही में अपने एक बयांन में कहा था कि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले हमारे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने तीन साल में नक्सलवाद को खत्म करने की कसम खाई थी,मुझे विश्वास है कि हम ऐसा कर पाएंगे।
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इधर नक्सल समस्या पर विपक्ष के अपने सवाल हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विपक्ष में आने के बाद नक्सलियों के आत्मसमर्पण और मुठभेड़ों की सत्यता पर सवाल उठाते दिख रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि नक्सलवाद के बहाने आदिवासियों पर झूठे आरोप लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आई हैं, जो कांग्रेस के कार्यकाल में कभी नहीं देखी गई। आदिवासियों के प्रति भाजपा का नजरिया इससे देखा जा सकता है।

वहीं छत्तीसगढ़ कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि नक्सलवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार मतिभ्रम का शिकार है। विष्णुदेव साय सरकार अभी तक अपनी नक्सल नीति नहीं घोषित कर पाई है। उसे पहले अपनी नक्सल नीति स्पष्ट करनी चाहिए।

शुक्ला ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में पिछले पांच साल पहले,जब कांग्रेस की सरकार थी, तो उन दिनों नक्सली घटनाओं में 80 फीसदी की कमी आई थी। जिसका कारण विकास और सुरक्षा पर आधारित नक्सली नीति थी। इसी वजह से हमारे सुरक्षाबलों के जवानों का हौसला बुलंद था। और माओवादी प्रभावित इलाकों से जनसमर्थन मिल समर्थन मिल रहा था।
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