CJI रमना ने की न्यायपालिका में महिलाओं के 50% आरक्षण की वकालत, कहा- 'यह आपका अधिकार'

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिश रमना ने रविवार को न्यायपालिका में महिलाओं के 50% आरक्षण की वकालत की।

नई दिल्ली, 26 सितंबर। भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने रविवार को न्यायपालिका में महिलाओं के 50% आरक्षण की वकालत की। सुप्रीम कोर्ट की महिला अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'हमें न्यायपालिका में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की आवश्यकता है... यह हजारों वर्षों के उत्पीड़न का मुद्दा है। न्यायपालिका के निचले स्तरों में 30 प्रतिशत से कम न्यायाधीश महिलाएं हैं... उच्च न्यायालयों में यह 11.5 प्रतिशत है... उच्चतम न्यायालय में केवल 11-12 प्रतिशत महिलाएं हैं।' उन्होंने आगे कहा कि यह आपका अधिकार है...आप न्यायपालिका और लॉ कॉलेजों में आरक्षण की मांग करने के हकदार हैं।

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    CJI NV Ramana ने कहा, महिलाओं को Judiciary, में मिले 50% Reservation | वनइंडिया हिंदी
    NV Ramana

    सभी स्तरों पर महिलाओं को 50% आरक्षण दिया जाए
    इस महीने की शुरुआत में, न्यायपालिका में महिलाओं की कम उपस्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए, रमना ने कहा कि 'बड़ी मुश्किल से', सुप्रीम कोर्ट ने अपनी पीठ पर महिलाओं का केवल 11 प्रतिशत प्रतिनिधित्व हासिल किया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में मौजूदा 33 न्यायाधीशों में से 4 महिला न्यायधीश हैं। सीजेआई ने कहा कि अधिकांश महिलाएं पेशे के भीतर संघर्ष की वकालत करती हैं। आजादी के 75 साल बाद हम सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कम से कम 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की उम्मीद करते हैं। उन्होंने कहा कि बहुत कम महिलाओं को शीर्ष स्तर पर प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलता है। इसके बाद भी उन्हें आज भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। न्यायमूर्ति रमना ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा उन्हें सम्मानित करने के लिए आयोजित एक समारोह में कहा कि आजादी के 75 साल बाद सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कम से कम 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की उम्मीद की जा रही है, लेकिन मैं यह स्वीकार करता हूं अब हमने सर्वोच्च न्यायलय की पीठ पर महिलाओं का केवल 11 प्रतिशत प्रतिनिधित्व हासिल किया है।

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    वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 4 महिला न्यायाधीश

    शीर्ष अदालत में वर्तमान में चार महिला न्यायाधीश हैं - जस्टिस इंदिरा बनर्जी, हेमा कोहली, बी वी नागरत्ना और बेला एम त्रिवेदी। शीर्ष अदालत में 31 अगस्त को ऐसा पहली बार हुआ जब एक सात तीन महिला न्यायाधीशों समेत 9 न्यायाधीशों ने एक बार में पद की शपथ ली। न्यायमूर्ति नागरत्ना को सितंबर 2027 में देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश की शपथ दिलाई जा सकती है।

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