'कोर्ट का प्रोसेस सजा जैसा, लोग समझौते की तलाश करते हैं', आखिर क्यों CJI चंद्रचूड़ ने दिया लोक अदालत पर जोर
CJI DY Chandrachud on Lok Adalat: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ शनिवार (03 अगस्त) को स्पेशल लोक अदालत वीक के स्मरणोत्सव समारोह में शामिल होने पहुंचे, जहां उन्होंने कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के सामने अदालती कार्यवाही से 'तंग' हो चुके आम लोगों की दुर्दशा का मुद्दा उठाया।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के 75 साल पूरे होने के मौके पर 29 जुलाई से 3 अगस्त तक स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया गया था। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के रूप में लोक अदालतों के महत्व पर प्रकाश डाला।

सीजेआई ने जोर देकर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया वादियों के लिए एक सजा है, जिसके कारण वे अक्सर अपने कानूनी अधिकारों से भी कम समझौते स्वीकार करके थकाऊ मुकदमे को खत्म करने के लिए हताश होकर समझौते की तलाश करते हैं।
मोटर दुर्घटना केस का दिया हवाला
इसी के साथ सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कई मामलों का भी हवाला दिया, जो विशेष लोक अदालत में निपटाए गए थे। उन्होंने एक मोटर दुर्घटना मामले का हवाला दिया, जिसमें दावेदार वृद्धि के हकदार होने के बावजूद कम मुआवजे के लिए मामले को निपटाने के लिए तैयार था।
कोई भी समझौता चाहते हैं-CJI
सीजेआई ने कहा, "पक्ष किसी भी तरह के समझौते को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं, क्योंकि वे सिस्टम से बाहर निकलना चाहते हैं।" विशेष लोक अदालत के स्मरणोत्सव समारोह में बोलते हुए सीजेआई ने कहा, "लोग इतना परेशान हो जाते हैं कि कोर्ट के मामलों से वो कोई भी समझौता चाहते हैं। बस कोर्ट से दूर करा दीजिए। यह भी एक समस्या है, जिसे हम न्यायाधीशों के रूप में देखते हैं। यह प्रक्रिया ही सजा है और यह हम सभी न्यायाधीशों के लिए चिंता का विषय है।"
केंद्रीय कानून मंत्री भी रहे मौजूद
उन्होंने कहा कि लोक अदालतों के माध्यम से न्याय देने की प्रक्रिया को संस्थागत बनाने की जरूरत है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने कहा कि मध्यस्थता भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने महाभारत में कौरवों और पांडवों के बीच मध्यस्थता करने का प्रयास किया था।
विशेष लोक अदालत की गई थी आयोजित
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को विशेष लोक अदालत सप्ताह के लिए एक स्मरणोत्सव समारोह आयोजित किया जो 29 जुलाई से शुरू हुआ और 2 अगस्त को समाप्त हुआ। इस सप्ताह के दौरान अदालत ने मामलों को निपटाने के प्रयास में हर दोपहर लोक अदालत के मामलों की सुनवाई की। मालूम हो कि लोक अदालतें न्यायिक प्रणाली का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, जो विवादों के वैकल्पिक समाधान की सुविधा प्रदान करती हैं, ताकि सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा दिया जा सके।
सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, विशेष लोक अदालत के लिए चुने गए मामलों की संख्या 14,045 थी। लोक अदालत पीठों के समक्ष 4,883 मामले सूचीबद्ध किए गए और 920 मामलों का निपटारा किया गया।












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