CJI डीवाई चंद्रचूड़ बोले- असल देश राजधानी से कहीं दूर बसता है, वहां तक समान न्याय पहुंचाने की जरूरत

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि देश राजधानी में नहीं बल्कि कहीं दूर बसता है, हर किसी को समान न्याय मिलना चाहिए, इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की जरूरत

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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा समान न्याय व्यवस्था पर जोर दिया है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के एस ब्लॉक के उद्धाटन के मौके पर यह बात कही है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा समान न्याय हर किसी को मुहैया कराने के लिए न्यायिक सेटअप के प्रशासन और डिजाइन पर खास ध्यान देने की जरूरत है। हमे जमीनी स्तर पर शुरुआत करने की जरूरत है, जिसमे हमारी जिला न्यायपालिका खास अहमियत रखती है। मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि हमारी न्यायिक प्रणाली और अदालत कक्ष लोकतांत्रिक समावेशी और समान रूप से सुलभ होने चाहिए, इसका निर्माण ऐसा होना चाहिए कि अर्थपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने वाले विविध पृष्ठभूमि के लोग हो सकें

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा मैं हमेशा से यह मानता हूं कि राजधानी में सर्वश्रेष्ठ इंफ्रास्ट्रक्चर को लोग पसंद करते हैं, लेकिन भारत राजधानी से कहीं दूर बसता है, जहां पर हमे सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है। हमारी न्याय व्यवस्था, कोर्टरूम लोकतांत्रिक होना चाहिए, हर किसी की पहुंच में होना चाहिए। इसका डिजाइन ऐसा हो जहां पर हर क्षेत्र और परिवेश से आए लोग अपनी हिस्सेदारी महसूस कर सके। वहीं इस कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा निकट भविष्य में भारतीय न्यायपालिका कागज रहित हो जाएगी। उसके लिए वकीलों को तैयार होना होगा। जब न्यायपालिका पूरी तरह से डिजिटल होगी तो न्याय वितरण प्रणाली पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा

बता दें कि इससे पहले जस्टिस चंद्रचूड़ ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट पर सवाल खड़ा किया था। उन्होंने कहा था कि छात्रों के लिए समावेशी कानूनी शिक्षा मिलनी चाहिए। क्लैट के जरिए छात्रों की क्षमता का टेस्ट होता है, लेकिन जरूरी नहीं है कि इससे सही छात्रों का चयन हो। देश में कुल 25 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी हैं, जिनमे प्रवेश के लए हर साल क्लैट की परीक्षा कराई जाती है। जिसके जरिए छात्रों को नेशनल लॉ कॉलेज और अन्य कॉलेज में प्रवेश के लिए होता है।

सीजेआई ने कहा कि छात्रों के पास कानून में भविष्य बनाने के लिए सही विचार होने की जरूरत है। यह विचार ऐसा होना चाहिए जो न्यायपूर्ण समाज, मूल्यपरक समाज की सोच हो। मैं वाइस चांसलर से अपील करता हूं कि वह अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्रों को शिक्षा दें। अच्छी शिक्षा के लिए संसाधन की जरूरत होती है। सीजेआई ने सलाह दी है कि विश्वविद्यालय के छात्रों को अपने पहले साल को सिर्फ पढ़ाई के लिहाज से देखना चाहिए।

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