Citizenship amendment bill: थरूर बोले, अमित शाह ने इतिहास की कक्षा में ध्यान नहीं दिया

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन बिल को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। जिस तरह से गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में इस बिल के समर्थन में तर्क दिए और इसका पुरजोर समर्थन किया, उसके बाद कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने उनके व सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने अमित शाह पर तीखा हमला बोलते हुए उनपर तंज कसा है।

दो राष्ट्र की बाद हिंदू महासभा व मुस्लिम लीग ने की

दो राष्ट्र की बाद हिंदू महासभा व मुस्लिम लीग ने की

अमित शाह पर तंज कसते हुए थरूर ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष इतिहास की कक्षा में ध्यान नहीं देते थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश के धर्म के आधार पर बंटवारे के लिए जिम्मेदार है। जबकि मुस्लिम लीग व हिंदू महासभा ने दो देशों के सिद्धांत को आगे किया था। दरअसल अमित शाह ने कहा था कि देश का धर्म के आधार पर बंटवारा हुआ इसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार है हम नहीं। यह भाजपा है जो धर्म के आधार पर पाकिस्तान व बांग्लादेश में जिन अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुआ उन्हें इन नागरिकता संशोधन बिल के जरिए नागरिकता दे रही है।

इतिहास की कक्षा में ध्यान नहीं दिया

इतिहास की कक्षा में ध्यान नहीं दिया

अमित शाह के बयान पर थरूर ने कहा कि मुझे नहीं लगता वह इतिहास की कक्षा में ध्यान देते थे। अगर आप देश के इतिहास पर ध्यान दें तो आजादी के आंदोलन के समय सिर्फ दो ही गुट थे जिन्होंने दो राष्ट्र का सिद्धांत दिया और वो हिंदू महासभा व मुस्लिम लीग थे। दोनों ने कहा कि हिंदू व मुसलमान अलग देश हैं। हर नेता ने इसका बहिष्कार किया और कहा कि यह देश हर किसी का है। कांग्रेस ने भी कहा कि वह हर किसी की प्रतिनिधि है।

लोगों के भीतर भय

लोगों के भीतर भय

भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह लोगों के भीतर भय फैला रही है, जिसपर थरूर ने कहा कि दिक्कत ये है कि हमे भय पैदा करने की जरूरत नहीं है, यह पहले से ही लाखों लोगों के भीतर है, यह डर ना सिर्फ मुसलमानों बल्कि तमाम लोगों के भीतर है। थरूर ने कहा कि वो जिन्ना थे जिन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर उनका देश तय होना चाहिए। जबकि महात्मा गांधी, अंबेडकर, नेहरू, मौलाना आजाद जैसे नेताओं ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन हर किसी के लिए है और देश का ऐसा संविधान तैयार किया गया जिसमे हर किसी को समान माना गया है और यही हमारी देश की आत्मा है।

क्या हुआ असम में

क्या हुआ असम में

कांग्रेस सांसद ने कहा कि पहली बार देश में ऐसा कानून आने जा रहा है जो एक समुदाय को बाहर रख रहा है क्या यह हमारे संविधान का उल्लंघन नहीं है। इससे पहले अमित शाह ने कहा था कि मुसलमानों को डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। यह बिल घुसपैठियों के खिलाफ है। इसपर थरूर ने कहा कि आप कैसे साबित करेंगे कि वो घुसपैठिए नहीं हैं। हमे पता है कि असम में एनआरसी का क्या हुआ। 19 लाख लोग अपने दस्तावेज देने में विफल रहे।

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