CIC ने वित्त मंत्रालय से पूछा- नोटबंदी के बाद आया कितना कालाधान
नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने वित्त मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह एक साल पुरानी उस आरटीआई का जवाब दे, जिसमें सरकार से सवाल पूछा गया है कि नोटबंदी के बाद कितना कालाधन आया। खालिद मुंदापिल्ली नाम के शख्स ने खालिद ने 22 नवंबर, 2016 को आरटीआई कानून के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जवाब मांगा था। लेकिन पीएमओ की ओर से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसके बाद 9 जनवरी 2017 को खालिद ने पीएमओ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और पीएमओ के अधिकारियों की बढ़ गई मुश्किल।

पीएमओ के हाथ खाली, रेवेन्यू डिपार्टमेंट भी कन्फ्यूज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा के बाद खालिद मुंदापिल्ली ने 22 नवंबर, 2016 को आरटीआई कानून के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से पूछा था नोटबंदी के बाद उनके पास कितना कालाधन जमा हुआ। जब मुंदापिल्ली को 30 दिनों के भीतर जवाब नहीं मिला तो उन्होंने आयोग के पास पीएमओ की शिकायत की। खालिद की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने पीएमओ के अधिकारियों से देरी का कारण पूछा। इस पर पीएमओ के अधिकारी ने माफी मांगी और मामला रेवेन्यू डिपार्टमेंट को ट्रांसफर कर दिया। लेकिन वहां से भी एक साल बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला है।
पीएमओ के अधिकारी को सूचना आयोग ने बख्शा
मुख्य सूचना आयुक्त आर के माथुर ने प्रधानमंत्री कार्यालय को आरटीआई कानून के तहत दंड तो नहीं दिया, लेकिन उन्होंने वित्त मंत्रालय से आरटीआई का जवाब देने को कहा है। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने आरटीआई का जवाब समय पर न देने के बाद माफी मांग ली थी।
30 दिनों के भीतर देना होता है आरटीआई का जवाब
आरटीआई कानून के तहत सूचना आयोग 30 दिनों तक जवाब नहीं देने पर कार्रवाई करने का अधिकार रखता है। अगर आयोग को लगता है कि इस देरी के पीछे कोई उचित कारण नहीं है या फिर किसी गलत मंशा से जवाब नहीं दिया गया है तो ऐसी स्थिति में वह जुर्माना लगा सकता है। हालांकि, इस मामले में पीएमओ को इसलिए बख्श दिया गया, क्योंकि अधिकारी ने माफी मांग ली और देरी के लिए वाजिब वजह भी बताई।












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