डबल सिंग्नल क्यों दे रहे हैं चिराग पासवान? क्या झारखंड चुनाव के लिए BJP से कर रहे हैं मोल भाव
एलजेपी (राम विलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान आजकल संकेतों की राजनीति करने में लगे हुए हैं। लेकिन, जिस तरह से अगले महीने झारखंड विधानसभा चुनाव होने की संभावना है और अलगे साल बिहार में भी इलेक्शन है, उससे लगता है कि वह अपनी पार्टी के लिए चुनावी गोटियां सेट करना चाहते हैं।
चिराग पास इन दिनों ऐसे संकेत दे रहे हैं, जिससे कभी लगता है कि वह भाजपा को झटका दे सकते हैं, तो कभी लगता है कि वह इंडिया ब्लॉक की दुखती रग को दबाने की रणनीति पर लगे हुए हैं। वह यह भी कहते हैं कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ कभी नहीं छोड़ सकते।

...तो मंत्री पद ठुकराने में नहीं हिचकिचाऊंगा- चिराग पासवान
मंगलवार को एलजेपी (राम विलास) ने पटना में अपनी पार्टी की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति इकाई की एक बैठक आयोजित की थी। यह बैठक मूलरूप से केंद्रीय मंत्री बनने पर चिराग को सम्मानित करने के लिए आयोजित की गई थीं।
इस बैठक में उन्होंने कहा, 'जिस दिन मुझे लगेगा कि हमारे लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है या उनकी नहीं सुनी जा रही है, मैं अपने पिता की तरह मंत्री पद ठुकराने में नहीं हिचकिचाऊंगा।' चिराग को आखिर इतने शख्त शब्दों का इस्तेमाल क्यों करना पड़ा और इसके पीछे क्या कारण है, यह तो वही जानते हैं। लेकिन, संदेश यही निकला कि वह केंद्र में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए को सख्त संदेश देना चाहते हैं।
इंडिया ब्लॉक को अंबेडकर के मसले पर घेरने की कोशिश
लेकिन, अगली ही लाइन में उन्होंने जो कुछ कहा, उसने सियासी जानकारों को भी भ्रमित कर दिया है। उन्होंने कहा, 'मेरे पिता यूपीए सरकार में भी मंत्री थे। और पहले काफी सारी चीजें हुईं, जो कि दलित हितों के लिए मायने रखती थीं। यहां तक कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में बाबासाहेब अंबेडकर की तस्वीरें भी नहीं लगाई गईं। इसलिए, हम अलग हो गए।'
अंबेडकर दलित राजनीति के केंद्र बिंदू हैं। ऐसे में यूपीए पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाकर उन्होंने मौजूदा इंडिया ब्लॉक की राजनीति पर भी निशाना साधने की कोशिश की है।
पीएम मोदी का साथ नहीं छोड़ने का वादा
लेकिन, इन दो धाराओं वाले बयानों के साथ ही उन्होंने अपनी यह बात भी दोहरा दी है कि वह तबतक एनडीए में बने रहेंगे, जबतक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री रहेंगे। वे खुद को पीएम मोदी का हनुमान बता चुके हैं। उन्होंने दलितों से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री की चिंता के लिए उनकी सराहना भी की है।
झारखंड में एनडीए से सीटों पर मोल भाव की मंशा
एलजेपी चीफ ने 28 नवंबर को पटना में एक रैली की भी घोषणा की है और हाल ही में झारखंड में पार्टी की चुनावों में भागीदारी को लेकर भी बड़ा बयान भी दे चुके हैं। रविवार को ही उन्होंने कहा था, 'झारखंड में हम गठबंधन में या अकेले चुनाव लड़ेंगे, इसको लेकर बातचीत चल रही है। अगर गठबंधन को लेकर बातचीत का परिणाम सकारात्मक निकला तब तो ठीक है। एलजेपी कहीं से भी चुनाव लड़ने में सक्षम है।'
इससे पहले असम के मुख्यमंत्री और झारखंड में बीजेपी के सह-चुनाव प्रभारी हिमंता बिस्वा सरमा ने सिर्फ जेडीयू और आजसू से सीटों पर तालमेल की बात कही थी। उन्होंने कहा था, 'चुनावों में हमारा जेडीयू और एजेएसयू के साथ गठबंधन होगा। सीटों का बंटवारा लगभग तय है, 1-2 सीटों पर चर्चा चल रही है। पितृपक्ष खत्म होने के बाद हम गठबंधन की घोषणा कर देंगे।'
एनडीए और इंडिया ब्लॉक के नेताओं के एक वर्ग को लगता है कि चिराग जो बयान दे रहे हैं, उसके पीछे झारखंड में भी एनडीए से सीटें लेने के लिए मोल भाव करना चाहते हैं और इसके लिए बिहार में भी ताकत दिखाए जाने की तैयारी की जा रही है।












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