Chintan Shivir: 65 साल में रिटायरमेंट का फॉर्मूला, लागू हुआ तो कांग्रेस के इन सभी नेताओं की हो सकती है छुट्टी

जयपुर, 17 मई: उदयपुर में हाल में संपन्न हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर में पार्टी के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। चर्चा हुई है कि कैसे पार्टी भारतीय जनता पार्टी का सामना करे, संगठन में क्या बदलाव किए जाएं। इसके लिए कई तरह के सुझाव भी आए हैं और प्रस्ताव भी पास हुए हैं। इसी में से एक बड़ा फैसला ये है कि पार्टी आने वाले दिनों में अपने 50 फीसदी पद युवाओं के लिए आरक्षित करेगी। लेकिन, इसके अलावा पार्टी ने एक और बड़ा फैसला लिया है। यह है 65 साल से ज्यादा उम्र वाले नेताओं की छुट्टी। लेकिन, यह फैसला विवादों में उलझ गया। लिहाजा, कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे दो साल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

65 साल में कांग्रेसियों के रिटायरमेंट की सिफारिश

65 साल में कांग्रेसियों के रिटायरमेंट की सिफारिश

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अमरिंदर सिंह बरार की अध्यक्षता वाली कांग्रेस की यूथ कमिटी ने पार्टी को नेताओं के लिए 65 साल में रिटायर करने का फॉर्मूला दिया है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस वर्किंग कमिटी (सीडब्ल्यूसी) ने इस सिफारिश को 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद लागू करने का फैसला किया है। पार्टी की युवक कमिटी ने 65 साल में रिटायरमेंट की जो सिफारिश की है, उसको लेकर पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी भी सहमत हैं, लेकिन इसे दो साल के लिए टालना देना ही बेहतर समझा है। कांग्रेस का यह चिंतन शिविर राजस्थान के उदयपुर में आयोजित किया गया है, जो कि 9 साल बाद हुआ है। इस शिविर में गांधी परिवार के अलावा पार्टी के करीब 430 नेताओं ने शिरकत की है।

रिटायरमेंट वाले प्रस्ताव पर हुआ विवाद

रिटायरमेंट वाले प्रस्ताव पर हुआ विवाद

इस शिविर में पार्टी ने ' 6 मसौदा संकल्प' तैयार किए हैं, जिन्हें 6 कमिटियों के संयोजकों ने सोनिया गांधी को सौंपे हैं। यह समितियां विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए बनाई गई थी, जिनमें राजनीति, संगठन, किसान-कृषि, युवाओं से संबंधित मुद्दे, साजामिजक न्याय, कल्याण और अर्थव्यवस्था शामिल हैं। इस चिंतन शिविर में 50 से कम उम्र के नेताओं को तरजीह दिए जाने का भी रास्ता साफ किया गया, जिनके लिए आरक्षण की घोषणा की गई है। लेकिन, 2024 के चुनाव तक के लिए वरिष्ठ नेताओं को पार्टी की ओर से मोहलत दी गई है। इस शिविर में पार्टी अध्यक्ष ने कई बड़े फैसलों पर मुहर लगाई है, लेकिन एक बड़े फैसले पर अमल फिलहाल टाल दिया है। यह मसला है पार्टी में रिटायरमेंट की उम्र 65 साल फिक्स करने का, जिसपर सोनिया भी सहमत थीं। लेकिन, इसपर हंगामा शुरू हो गया।

सोनिया ने 2024 तक के लिए किसी तरह टाला फैसला

सोनिया ने 2024 तक के लिए किसी तरह टाला फैसला

65 साल में रिटायरमेंट वाले मुद्दे पर लंबी बहस चली और आखिरकार तय हुआ कि इसपर जल्दीबाजी में फौरन अमल करना सही आइडिया नहीं है। खासकर जब पार्टी के बुरे दिन चल रहे हैं तो बड़े नेताओं को घर का रास्ता दिखाना सही नहीं रहेगा, क्योंकि कई वरिष्ठ नेता तो अपने राज्यों में नेतृत्व दे रहे हैं। अंत में काफी चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया कि इस प्रस्ताव को तुरंत लागू करने की जगह इसे 2024 के लोकसभा चुनाव तक स्थगित रखा जाए और उसके बाद इसे धीरे-धीरे लागू किया जाए। वैसे संगठन के भीतर के पदों पर 50 फीसदी युवा नेताओं की नियुक्ति पर सभी वरिष्ठ नेता आमतौर पर सहमत नजर आए हैं।

65 वाले फॉर्मूले पर इन नेताओं की हो सकती है छुट्टी

65 वाले फॉर्मूले पर इन नेताओं की हो सकती है छुट्टी

अगर कांग्रेस पार्टी अभी 65 साल में रिटायर्मेंट के फॉर्मूले को लागू करती तो उसके तमाम बड़े नेताओं की छुट्टी तय थी। इनमें पहली तो खुद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं, जो उम्र और स्वास्थ्य कारणों से अध्यक्ष पद एक बार बेटे को सौंपने के बाद मजबूरन अंतरिम अध्यक्ष बनकर 2019 से इसे फिर से संभाले जा रही हैं। इनके अलावा 65 साल वाले फॉर्मूले में जिन नेताओं को घर बैठना पड़ सकता है, उनमें हरियाणा से भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मध्य प्रदेश से कमलनाथ और दिग्विजय सिंह और हिमाचल प्रदेश से प्रतिभा वीरभद्र सिंह शामिल हैं। ये सभी 65 साल के ऊपर के हैं। इनके अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पी चिदंबरम, गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन बंसल जैसे नेता भी इसी दायरे में आ रहे हैं।

2024 में कितना आसान रहेगा इसपर अमल करना ?

2024 में कितना आसान रहेगा इसपर अमल करना ?

दिलचस्प बात ये है कि इनमें से प्रतिभा वीरभद्र सिंह इसी साल होने वाले हिमाचल विधानसभा चुनाव में, गहलोत और कमलनाथ अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में अपने-अपने राज्यों में पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी हैं। पार्टी ने 2024 की डेडलाइन तय की है, जब हरियाणा विधानसभा के चुनाव भी होंगे और हुड्डा ने फिर से सीएम बनने की आस नहीं छोड़ी है। बहरहाल, इन नेताओं के पास दो साल की मोहलत है, लेकिन उसके बाद भी पार्टी इसपर किस हद तक अमल कर पाएगी यह बड़ा सवाल बना रहेगा।

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