मोदी लाएंगे चीनी निवेश, चमकेगा भारतीय मिडिल क्लास
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) भले ही सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चालू चीन यात्रा को लेकर कुछ नेगेटिव राय भी जाहिर हो रही हैं, पर इस दौरे का मकसद बिजनेस है। चीन से निवेश आने से नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे। सबसे बड़ा लाभ तो मिडिल क्लास को होगा। क्योंकि उन्हें सबसे ज्यादा स्तरीय नौकरियों की तलाश है।
सीमा संबंधी विवाद
यानी भारत चीनी कंपनियों से भारत में निवेश की चाहत रखता है। अब सीमा संबंधी विवाद दोनों देशों के लिए पहले की तरह से अहम नहीं रहे।
मिडिल क्लास का दायरा
चीन मामलों के जानकार डा. राजीव सक्सेना कहते हैं कि भारत में मिडिल क्लास का दायरा बढ़ता जा रहा है। इसे बेहतर नौकरियों की तलाश है। ये मिलेंगी चीनी कंपनियों के भारत में तगड़ा निवेश करने से। क्योंकि अब आप यूरोप की कंपनियों से बहुत कुछ उम्मीद नहीं कर सकते।
मोटा निवेश लाएंगे
अब सारा दारोमदार संबंधों का व्यापार पर टिका हैं। मोदी की चाहत है कि वे अपने इस दौरे से चीन से 10 बिलियन डालर का निवेश भारत ले आएं।मोदी चाहते हैं कि चीनी कंपनियां भारत में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में मोटा निवेश करें। बता दें कि जंगशू ओवरसीज कंपनीज, लेनोवा, चाइना इंचरनेशनल ट्रेड एंड इंजीनियरंग कारपोरेशन जैसी अनेक चीनी कंपनियों ने भारत में निवेश करना शुरू कर दिया है।
सस्ती लेबर
इधर उन्हें सस्ती लेबर मिल जाती है। यहां पर इन कंपनियों को बड़ा बाजार भी मिलता है। लाभ दोनों को है। वे यहां से माल बनाकर भाहर भेजते है। बदले में यहां पर रोजगार देते हैं।
बढ़ेंगे रोजगार
याद रखिए कि भारत में चीनी या किसी अन्य देश से आने वाले निवेश का लाभ होगा रोजगार में इजाफे के रूप में। इसके चलते रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बाजार में इंजीनियरों, वास्तुकारों, चार्टर्ड एकाउँटेट से लेकर दूसरी तमाम तरह की नौकरियां क्रिएट होंगी। इसका लाभ ये होगा कि देश के मिडिल क्लास परिवारों के नौजवानों को रोजगार के मौके ज्यादा मिलेंगे।
सरकारी नौकरियों में कमी
प्रख्यात अर्थशास्त्री हरीश यादव मानते हैं कि अब सरकारी नौकरियां सिकुड़ रही है। अब नौकरियां प्राइवेट सेक्टर से ही आएंगी। इसलिए जरूरी है कि विदेशी निवेश बढ़े। निवेश बढ़ने से देश में इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
तगड़े निवेश का इरादा
उधर, चीन की ख्वाहिश है कि वह भारत समेत समूचे एशिया में रोड, रेलवे और बंदरगाह जैसे क्षेत्रों में तगड़ा निवेश करे। हालांकि चीन पाकिस्तान में भी तगड़ा निवेश कर रहा है। भारत इसके चलते परेशान भी है। इसके बावजूद उसे चीन से निवेश की दरकार है। क्योंकि निवेश के बिना तो नौकरियां पैदा नहीं होंगी।













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