सीमा विवाद के बीच चीन ने साझा किया ब्रह्मपुत्र नदी के प्रवाह का डाटा, बाढ़ रोकने में मिलेगी मदद

नई दिल्ली: ब्रह्मपुत्र नदी के पास बसे शहरों के लिए राहत भरी खबर है। सिक्किम और लद्दाख में हुए विवाद के बाद भी चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी के प्रवाह को लेकर भारत के साथ डाटा साझा करना शुरू कर दिया है। इन आंकड़ों की मदद से बाढ़ की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही बाढ़ आने से पहले लोगों को सतर्क किया जा सकेगा। आंकड़ों को साझा करने की ये प्रक्रिया अक्टूबर तक चलेगी।

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दरअसल ब्रह्मपुत्र एशिया की सबसे बड़ी नदी है, जो तिब्बत से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। ब्रह्मपुत्र नदी को चीन में यारलंग जांगबो के नाम से जाना जाता है। इसमें आने वाली बाढ़ से हर साल बड़ा नुकसान होता है। इस नदी के प्रवाह के बारे में डाटा साझा करने के लिए भारत और चीन में एक समझौता हुआ है। इस समझौते के मुताबिक 15 मई से अक्टूबर तक रोजाना दो बार ब्रह्मपुत्र नदी का डाटा साझा किया जाता है। वहीं एक जून से सतलुज नदी के डाटा को साझा करने की प्रक्रिया शुरू होती है।

मामले में जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी के प्रवाह को लेकर डाटा साझा करने की प्रक्रिया चीन ने शुरू कर दी है। जिसके तहत नदी की मुख्यधारा पर स्थित तीन हाड्रोलॉजिकल केंद्र नुगेशा, यांगकुन और नुक्सिया के आंकड़े भारत को मिलेंगे। वहीं एक जून से चीन त्साडा केंद्र से सतलुज नदी के आंकड़े मिलने शुरू हो जाएंगे। ब्रह्मपुत्र नदी के पास पूर्वोत्तर भारत के कई बड़े शहर बसे हैं। जिससे उन इलाकों में बाढ़ का आकलन किया जाएगा। 2017 में ब्रह्मपुत्र नदी में भीषण बाढ़ आई थी, जिस वजह से चीन के डाटा केंद्रों को नुकसान पहुंचा था। उस दौरान ये प्रक्रिया रुक गई थी।

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