CJI Sanjiv Khanna judgments: चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के वो पांच बड़े फैसले, जो हमेशा रखे जाएंगे याद
CJI Sanjiv Khanna major judgments: भारत के चीफ जस्टिस (CJI) संजीव खन्ना 13 मई 2025 को रिटायर हो रहे हैं। चीफ जस्टिस खन्ना का कार्यकाल महज छह माह का ही रहा लेकिन बहुत प्रभावशाली रहा। इस कार्यकाल में उन्होंने कई बड़े फैसले लिए जिसके लिए वो हमेशा याद किए जाएंगे।
CJI संजीव खन्ना से पहले डी वाई डी चंद्रचूड़ चीफ जस्टिस के पद पर थे, जो अपने बड़े फैसलों के साथ-साथ अपनी टिप्पणियों और विचारों को मुखरता से रखने के लिए जाने जाते थे। जिसके चलते वो खूब सुर्खियों में बने रहे। वहीं मितभाषी सीजीआई संजीव खन्ना सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते कभी नहीं नजर आए लेकिन उन्होंने जो निर्णय लिए वो भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में सदा के लिए दर्ज हो चुके हैं।

सीजीआई संजीव खन्ना का रहा शानदार करियर
जस्टिस खन्ना का करियर 2005 में दिल्ली उच्च न्यायालय में उनकी नियुक्ति के साथ शुरू हुआ और 13 मई 2025 को चीफ जस्टिस के तौर पर समाप्त हो रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ कैंपस से एलएलबी की स्नातक डिग्री हासिल करने वाले जस्टिस संजीव खन्ना की छवि ईमानदार और निष्पक्ष न्यायाधीश की रही। संजीव खन्ना सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एचआर खन्ना के भतीजे हैं।
जस्टिस कैशकांड में लिया बड़ा फैसला
चीफ जस्टिस के पद पर 11 नवंबर, 2024 को नियुक्ति के बाद से जस्टिस संजीव खन्ना का कार्यकाल चुनौतियों से भरा रहा। दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस यशवंत वर्मा "कैश स्कैंडल विवाद" मामले से निपटने का उनका तरीका देख हर कोई दंग रह गया था। न्यायमूर्ति वर्मा के आवास पर जली हुई नकदी मिलने के बाद सीजेआई ने 3 सदस्सीय कमेटी गठित की। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर केस से जुड़े तथ्य सार्वजनिक किए और जांच के बाद तुरंत कार्रवाई की जस्टिस वर्मा से इस्फीफा मांगा जब उन्होंने इनकार किया तो सीजेआई ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखा और अभियोजन चलाने की सिफारिश की। आखिरकार जस्टिस वर्मा को हाई कोर्ट जज के पद से इस्तीफा देना पड़ा।
जजों की संपत्ति का खुलासा
इस केस के बाद न्यायपालिका की छवि धूमिल ना हो लोगों का विश्वास देश की न्यायपालिका पर बना रहे इसलिए चीफ जस्टिस खन्ना ने 1 अप्रैल, 2025 को एक पूर्ण न्यायालय बैठक बुलाई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों की संपत्ति का पूरा खुलासा करने का प्रस्ताव पारित हुआ। खन्ना ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने के लिए भी राजी किया। साथ ही ये निर्णय लिया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा संपत्ति का खुलासा भविष्य में भी किया जाता रहेगा। जिससे न्यायपालिका की पारदर्शिता बढ़ेगी। सीजेआई का ये निर्णय स्कैंडल का सीधा जवाब था और न्यायपालिका के भीतर पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका कड़ा रुख था। दिल्ली में 3 फ्लैट, लाखों का सोना और भी बहुत कुछ, कितनी संपत्ति के मालिक हैं चीफ जस्टिस संजीव खन्ना
वक्फ संशोधन अधिनियम पर फैसला
वक्फ संशोधन अधिनियम के दो विवादास्पद पहलुओं पर अंतरिम रोक लगा दी, जिससे यह सुनिश्चित हो गया कि वक्फ संपत्तियों को गैर-अधिसूचित (denotify waqf property) नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने वक्फ परिषद में नई नियुक्तियों पर रोक लगाने का आदेश दिया।
कॉलेजियम की सिफारिशों का दिया ब्यौरा
इसके अलावा, न्यायिक नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद के आरोपों के बीच सीजेआई खन्ना ने कॉलेजियम द्वारा केंद्र सरकार को बीते तीन में भेजी गई सिफारिशों को सार्वजनिक किया। ये भी खुलासा किया कि इन सिफारिशों में कितने अल्पसंख्यक, ओबीसी, एसी-एसटी और कितनी महिला उम्मीदवार थीं। इसके ये भी खुलासा किया कि कौन से कैंडिडेट किस जस्टिस के रिश्तेदार थे। कौन हैं जज प्रेम कुमार? मोची पिता व मां ने मजदूरी करके पढ़ाया, क्यों चली गई थी नौकरी? सुप्रीम कोर्ट से बहाल
मंदिरों पर दावो संबंधी मामलों पर लगाई रोक
चीफ जस्टिस खन्ना ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए देश भर में स्थित पुराने मंदिरों पर दावों को लेकर दर्ज हो रहे मामलाें पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी। चीफ जस्टिस ने अपने फैसले में कहा 1991 के प्लेसस ऑफ वरशिप एक्ट (Places of Worship Act) की वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय में ना तो केस दर्ज हो सकता है और ना ही मंदिरों पर दावे को लेकर पहले से दर्ज केस में कोई भी कोर्ट प्रभावी आदेश दे सकती है।












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