Delhi: सीलबंद लिफाफा देख चीफ जस्टिस ने सरकार को दी हिदायत, OROP के बकाया भुगतान की बताई डेट
वन रैंक वन पेंशन मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने सरकार द्वारा सील बंद लिफाफे दिए जाने पर एटॉर्नी जनरल को कड़े शब्दों में हिदायत दी। उन्होंने इस तरह के लिफाफों को न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।

Delhi: वन रैंक वन पेंशन (OROP) मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ उस वक्त नाराज हो गए, जब उनके सामने मुहरबंद लिफाफा पेश किया गया। उन्होंने इसे न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया। जस्टिस ने मुहरबंद लिफाफे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें सरकार के शीर्ष वकील को इसे पढ़ने या इसे वापस लेने के लिए कहा गया।
हम कोई गोपनीय दस्तावेज या सीलबंद लिफाफे नहीं लेंगे- चीफ जस्टिस
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि, 'हम कोई गोपनीय दस्तावेज या सीलबंद लिफाफे नहीं लेंगे, और व्यक्तिगत रूप से इसके खिलाफ हैं। अदालत में पारदर्शिता होनी चाहिए।' यह आदेशों को लागू करने के बारे में है। यहां क्या गोपनीयता होनी चाहिए?' उन्होंने कहा वह सीलबंद लिफाफे के चलन को समाप्त करना चाहते हैं।
सील बंद लिफाफे को बताया न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ
चीफ जस्टिस ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि, अगर सुप्रीम कोर्ट इसका पालन करता है, तो उच्च न्यायालय भी इसका पालन करेंगे।' मुख्य न्यायाधीश ने सीलबंद लिफाफे को 'पूरी तरह से न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ' बताया। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि, 'इसका सहारा तभी लिया जा सकता है जब यह किसी स्रोत के बारे में हो या किसी के जीवन को खतरे में डालने वाला हो।' उन्होंने कहा कि अदालत पूर्व सैनिकों को ओआरओपी बकाया भुगतान पर सरकार की कठिनाइयों को देखती है, लेकिन कार्रवाई की योजना जानने की जरूरत है। इसके बाद अटॉर्नी जनरल ने रिपोर्ट पढ़ी।
पूर्व सैनिकों की याचिका पर सुनवाई कर रही है बेंच
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की बेंच वर्तमान में ओआरओपी बकाया के भुगतान पर भारतीय पूर्व सैनिक आंदोलन (आईईएसएम) की याचिका पर सुनवाई कर रही है। शीर्ष अदालत ने 13 मार्च को चार किस्तों में ओआरओपी बकाये का भुगतान करने के 'एकतरफा' निर्णय के लिए सरकार की जमकर खिंचाई की।
28 फरवरी, 2024 तक करना होगा पूर्व सैनिकों को ओआरओपी का बकाया भुगतान
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में शीर्ष अदालत में एक हलफनामा और एक अनुपालन नोट दायर किया है, जिसमें पूर्व सैनिकों को 2019-22 के लिए 28,000 करोड़ रुपये के बकाए के भुगतान की समय-सारणी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 फरवरी, 2024 तक पूर्व सैनिकों को ओआरओपी बकाया का भुगतान करने के लिए केंद्र सरकार को समय की अनुमति दी है।
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कोर्ट ने आदेश दिया कि 2019 से ओआरओपी का बकाया पारिवारिक पेंशन और वीरता पुरस्कार विजेताओं (कुल 6 लाख व्यक्तियों) को 30 मार्च तक, 70 वर्ष से अधिक पुराने पूर्व सैनिकों (लगभग 4 लाख) को 30 जून तक देय होगा, और बाकी (10-11 लाख) 31 अगस्त, 30 नवंबर और 28 फरवरी को। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हालांकि वह रक्षा मंत्रालय द्वारा ओआरओपी बकाया के भुगतान के लिए एकतरफा पत्र से चिंतित थी, जोकि 15 मार्च तक भुगतान करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है।












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