Chandrayaan 3: कुछ इस तरह से NASA-ESA करेंगे 23 अगस्त को लैंडिंग में इसरो की मदद
Chandrayaan 3: इसरो ने चंद्रयान मिशन को 14 जनवरी को लॉन्च किया था, इसके बाद से ही नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन और यूरोपियन स्पेस एजेंसी इसरो की इस मिशन में लगातार मदद कर रहे हैं। स्पेसक्राफ्ट के स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग में नासा और ईएसए दोनों ही इसरो की मदद कर रहे हैं।
ESOC Darmstadt जर्मनी के ग्राउंड ऑपरेशंस के इंजीनियर रमेश चेल्लथुरई ने बताया कि चंद्रयान 3 के लॉन्च के बाद से ईएसए चंद्रयान मिशन की मदद कर रहे हैं, सैटेलाइट के ऑर्बिट की ट्रैकिंग में मदद कर रहे हैं। फ्रेंच गुआना के कोरू में स्थित ईएसए के 1-मीटर एंटीना और गूनहिली अर्थ स्टेशन के 32 मीटर एंटीना को तकनीकी मदद के लिए चुना गया है।

चेल्लथुरई ने बताया कि ये दोनों ही स्टेशन चंद्रयान 3 मिशन के साथ लगातार संपर्क कर रहे हैं और मिशन के ऑपरेशन को लेकर बेंगलुरू की टीम के साथ जानकारी साझा कर रहे हैं। अब जब चंद्रयान 3 का लैंडर चांद की सतह पर 23 अगस्त को उतरने जा रहा है, ऐसे में इन एजेंसियों की मदद और भी अहम हो जाती है।
ऑस्ट्रेलिया स्थित न्यू नॉर्सिया में ईएसए 35 का डीप स्पेस एंटीना तीसरा ग्राउंड स्टेशन है जोकि लैंडर मॉड्यूल के साथ संपर्क करने में मदद कर रहा था। यह लैंडर मॉड्यूल के स्वास्थ्य, लोकेशन और इसके क्षेत्र की जानकारी इसरो को देने में मदद करेगा।
जहां तक नासा की बात है कि डीप स्पेस नेटवर्क इसरो को टेलीमेट्री और ट्रैकिंग पर नजर रखने में मदद कर रहा है। जेट प्रपोल्शन लैब के समी असमर ने बताया कि हम टेलीमेट्री से स्पेसक्राफ्ट के स्वास्थ्य और स्टेटस की जानकारी हासिल कर रहे हैं और इसे इसरो के साथ रियल टाइम शेयर कर रहे हैं।
हम डॉपलर इफेक्ट के लिए इसके रेडियो सिग्नल को भी मॉनिटर कर रहे हैं जोकि स्पेसक्राफ्ट को नेविगेट करने में मदद करता है। लैंडिंग के दौरान यह जानकारी काफी अहम होती है जोकि यह बताती है कि रियल टाइम में स्पेसक्राफ्ट कैसा कर रहा है।
समी असमर ने बताया कि कैलिफोर्निया स्थित डीएसएन कॉम्पलेक्स की ओर से इस मिशन को प्राथमिक मदद मुहैया कराई जा रही है। यह भारत से धरती की ओर दूसरी ओर स्थित है जोकि भारत की उस वक्त मदद करता है जब भारत के स्टेशन से चंद्रमा को नहीं देखा जा सकता है।












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