Chandrayaan-3: चांद पर क्या खोजेगा चंद्रयान 3 का 'विक्रम' और 'प्रज्ञान'?
Chandrayaan chand par kya kojega:भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद (इसरो) का चंद्रयान 3 शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित हरीश धवन से सफलतापूर्वक लॉन्चिंग करने में कामयाबी हासिल कर ली है।
भारत के मून मिशन के तहत लॉन्च किया गया चंद्रयान 3 चंद्रयान 2 का फॉलोअप है। याद रहे चंद्रयान 2 लॉन्चिंग के बाद चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग करते समय फेल हो गया था। जिस कारण इसरो का इतना बड़ा मिशन फेल हा गया था। ऐसे में इस बार चंद्रयान 3 का सबसे बड़ा मकसद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाना है।

चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अभी तक कोई नहीं पहुंच सका है
दक्षिणी ध्रुव जो अंधेरे में डूबा हुआ हैं जहां अभी तक कोई भी नहीं पहुंच सका है अगर द्वारा चंद्रयान 3 का विक्रम लैंडर सुरक्षित तरीके से लैडिंग कर लेता है तो भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा हालांकि चंद्रमा की सतह पर लैंडर उतारने वाला रूस, अमेरिका और चीन के बाद चौथा देश बन जाएगा।
चंद्रयान 3 जानें कब चांद पर करेगा लैंड
चंद्रयान 2 भी दक्षिणी ध्रुव पर उतारने के लिए भेजा गया था लेकिन हार्ड लैडिंग की वजह से वो फेल हो गया था जिस कारण इस बार च्रंद्रयान 3 में कुछ बदलाव और सुधार करके भेजा जा रहा है। चंद्रयान 3 दक्षिणी ध्रुव पर वैज्ञानिकों के अनुसार 22 से 23 अगस्त को चांद की सतह पर लैंड करेगा।
चांद का दक्षिणी ध्रुव क्यों है खास
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर दुनिया भर के वैज्ञानिकों की निगाहें क्यों हैं इसका जवाब ये है कि पृथ्वी के जैसा चांद का भी दक्षिणी ध्रुव है, पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुव जैसे अंटार्कटिका ठंडा रहता है उसी तरह चांद का भी दक्षिणी ध्रुव सबसे अधिक ठंडा रहता है लेकिन इसके अधिकांश इलाके में गुप्प अंधेरा छाया रहता है।
चांद पर क्या ढूढेगा विक्रम
वैज्ञानिकों के अनुसार चांद का ये हिस्सा ठंडा होने के कारण यहां पानी और खनिज समेत अन्य प्राकृतिक संसाधन हो सकते हैं। भारत के इस मून मिशन का उद्देश्य चांद के दक्षिणी ध्रुव इलाके में पानी और खनिज की तलाश करना है। चीन अमेरिका, रूस सभी की निगाहें चांद के इस हिस्से पर टिकी हुई है।
चांद की सतह पर सॉफ्ट लैडिंग हो जाती है तो भारत रचेगा नया इतिहास
चंद्रयान 3 मिशन अगर इस बार सफल लैंडिंग करने में सफल होता है तो भारत के लिए ये बहुत बड़ी कामयाबी होगी और भारत चांद के इस क्षेत्र में जानकारियां जुटाने वाला पहला देश बन जाएगा।
नासा ने पता लगाई थी ये चीज
नासा ने 1998 में अपने मून मिशन में यहां पर हाइड्रोजन होने का पता लगाया था, चूंकि वहां पर हाईड्रोजन है बर्फ जरूर होगी। नासा के अनुसार यहां गड्ढ़े पहाड़ सब कुछ मौजूद है सूरज की रोशनी चांद के हिस्से पर बहुत कम पड़ती है।
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