चंडीगढ़ मेयर चुनाव: धांधली करने वाले अनिल मसीह का क्या होगा, मुकदमा चलेगा या सीधे जाएंगे जेल?

Chandigarh Mayor Elections News: देश के इतिहास में मंगलवार को पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी चुनाव के बैलेट पेपर की गिनती सुप्रीम कोर्ट में हुई हो। इस गिनती के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव का परिणाम पलट दिया है और आम आदमी पार्टी के कुलदीप कुमार को नया मेयर घोषित किया है।

सुप्रीम कोर्ट बैलेट पेपरों की जांच के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि इस चुनाव के रिटर्निंग अफसर अनिल मसीह ने ही कथित रूप से मत पत्रों के साथ छेड़छाड़ की थी, जिसके बाद 8 बैलेट पेपर अमान्य घोषित कर दिए गए थे।

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अनिल मसीह का अब क्या होगा?
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने अनिल मसीह की हरकतों को आड़े हाथों लिया है। अब सवाल है कि अनिल मसीह के साथ आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ इस केस को लेकर झूठी गवाही की कार्यवाही (perjury proceedings) चलाने का आदेश दिया है।

अदालत ने न्यायिक रजिस्ट्रार को निर्देश दिए हैं कि मसीह को नोटिस जारी की जाए और कोर्ट के सामने गलत बयान देने के लिए अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू हो।

मसीह को तीन सप्ताह का समय दिया गया है, इस दौरान उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में यह बताना होगा कि उनके खिलाफ झूठी गवाही की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

इस मामले में सजा का क्या प्रावधान है?
सुप्रीम कोर्ट ने अनिल मसीह के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत झूठी गवाही का मामला चलाने का फैसला लिया है। इस धारा के तहत न्यायिक कार्यवाही के दौरान जानबूझकर गलत साक्ष्य या झूठे साक्ष्य देने के लिए सजा मिलती है।

इस धारा के तहत अदालती कार्यवाही में जानबूझकर गलत या झूठे साक्ष्य देने पर 3 साल से लेकर 7 साल की सजा और जुर्माना दोनों का ही प्रावधान है।

अदालत के निर्देश पर हुई फिर से मतगणना
सुनवाई के दौरान सीजीआई डीवाई चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की कि मसीह ने जिन बैलेट को खराब किया है, उसे मान्य मानते हुए मतों की फिर से गिनती होनी चाहिए। अदालत ने खरीद-फरोख्त की आशंका जताते हुए हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से नामित न्यायिक अधिकारी की निगरानी में फिर से मतगणना के निर्देश दिए थे।

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में क्या हुआ था?
30 जनवरी को चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी ने आम आदमी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की थी। रिटर्निंग अफसर ने गठबंधन उम्मीदवार के पक्ष में पड़े आठ वोटों को अमान्य घोषित कर दिया था, जिसके बाद मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ का विवाद शुरू हुआ।

कुल 36 वोट पड़े थे। बीजेपी के पक्ष में 16 पड़े थे और गठबंधन उम्मीदवार के उम्मीदवार के पक्ष में पड़े 20 वोटों में से 8 रद्द हो जाने की वजह से उनके वोटों की संख्या सिर्फ 12 रह गई थी। इस वजह से उनका उम्मीदवार हार गया था और भाजपा प्रत्याशी मनोज सोनकर को जीत मिल गई थी।

इस बीच विवाद के बीच आम आदमी पार्टी के 3 पार्षद भाजपा में शामिल हो चुके हैं, इससे उनके समर्थक पार्षदों की संख्या घटकर 17 रह गई है।

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