अधिकार क्षेत्र को लेकर फिर केंद्र-दिल्ली सरकार में फिर मतभेद, SC में हुई बहसबाजी
नई दिल्ली, 13 अप्रैल। दिल्ली में फैसले लेने का असल अधिकार किसे है, इसको लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच सुप्रीम कोर्ट में काफी बहस देखने को मिली। केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि केंद्र और सत्ता के अधिकार क्षेत्र की सीमा को फिर से संविधान बेंच के जरिए तय किया जाना चाहि। प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार की क्या सीमाएं यह स्पष्ट होना चाहिए। वहीं दिल्ली सरकार ने केंद्र के रुख का विरोध करते हुए कहा कि इस बात का त्वरित फैसला होना चाहिए कि क्या दिल्ली सरकार के पास यह अधिकार है कि वह ब्यूरोक्रैट का ट्रांसफर कर सके।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दिल्ली सरकार के पास मुख्य रूप से तीन विषय हैं जो आर्टिकल 239एए में स्पष्ट हैं, जिसके अनुसार दिल्ली सरकार इन विषय पर कानून नहीं बना सकती है, लिहाजा यह बात पांच जजों की बेंच के द्वारा स्पष्ट होनी चाहिए। बता दें कि इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही थी। इससे पहले 2018 में सवैधानिक बेंच ने स्पष्ट कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के संबंध में केंद्र सरकार की कार्यकारी शक्ति अनुच्छेद 239AA की उपधारा 3 के तहत भूमि, पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था तक ही सीमित है। लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेता और एएसजी संजय जैन ने कहा कि फैसले में यह स्पष्ट नहीं है कि दिल्ली सरकार के पास इन तीन चीजों के अलावा अन्य विषय पर कानून बनाने का अधिकार है।












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