देविंद्र पाल सिंह भुल्लर की फांसी के खिलाफ केंद्र सरकार!

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कहा कि भुल्लर की दया याचिका पर फैसला लेने में पहले ही एक दशक से ज्यादा का समय लग चुका है। भुल्लर ने अपनी मौत की सजा को उम्र कैद में बदलने के लिए गुहार लगाई थी और इसके लिए उसने अपनी मानसिक हालत का हवाला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह या तो भुल्लर की याचिका पर अपना फैसला सुनाए नहीं तो सुप्रीम कोर्ट इस पूर मुद्दे पर कोई फैसला लेगा। पिछले साल अप्रैल में सिख संगठनों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर भुल्लर की मौत की सजा को उम्र कैद में बदलने की मांग की थी। इन संगठनों का कहना था कि भुल्लर पहले ही काफी कुछ झेल चुका है और अब उस पर सरकार को दया दिखानी चाहिए।
देंविंद्र पाल सिंह भुल्लर साल 1993 में नई दिल्ली में एक कार बॉम्बिंग का आरोपी है जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई थी। भुल्लर ने यह हमला उस समय कांग्रेस की युवा विंग के नेता एमएस बिट्टा को निशाना बनाने के लिए किया था। बिट्टा उस समय सिख अलगाववाद के आलोचक थे। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हालांकि इस हमले के बाद भुल्लर जर्मनी भाग गया था लेकिन साल 1995 में उसे देश वापस लाया गया।
साल 20 01 में ट्रायल कोर्ट की ओर से भुल्लर को फांसी की सजा सुनाई गई लेकिन साल 2002 में उसने दया याचिका दाखिल कर दी थी। साल 2011 में उस समय की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी भुल्लर की दया याचिका ठुकरा दी थी। पिछले वर्ष अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी दया याचिका को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि किसी भी दोषी को सिर्फ इस आधार पर दया नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि उसे फांसी मिलने में देरी हो रही है या फिर उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है।












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