CBSE परीक्षा रद्द करने पर हम सहमत, लेकिन इसके खिलाफ याचिकाओं को भी सुनना जरूरी- सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, 21 जून: कोरोना महामारी को देखते हुए कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार ने CBSE 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी थी। इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी खुशी जाहिर की, लेकिन कुछ लोगों ने इसको चुनौती देते हुए नई याचिकाएं डाल दीं। जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई। साथ ही कोर्ट ने CBSE से कहा कि हमने आपकी स्कीम को सैद्धांतिक रूप से सहमति दी है, लेकिन कुछ लोग इसके खिलाफ हमारे पास आए हैं। इस वजह से उनको सुनना जरूरी है। कोर्ट ने ये भी साफ किया कि सिर्फ उन्हीं याचिकाओं को सुना जाएगा, जो अब तक कोर्ट के पास आई हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि सीबीएसई ने अपनी पूरी प्लानिंग हमें बता दी है। साथ ही कुछ छात्रों की ओर से फिजिकल परीक्षा करवाने के लिए याचिका दायर की गई है। ऐसे में वो दोनों का बिंदुवार अध्ययन करेंगे। इसके अलावा कोर्ट सिर्फ उन्हीं याचिकाओं को सुनेगा, जो अब तक दायर की गई हैं। साथ ही रजिस्ट्रार को निर्देश दिया जाएगा कि वो नई याचिकाओं को किसी भी कीमत पर स्वीकार ना करें। इसके बाद कोर्ट ने सोमवार की सुनवाई स्थगित कर दी। अब मंगलवार दो बजे इस याचिका पर सुनवाई होगी।
याचिकाकर्ताओं की क्या दलील?
यूपी पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से पेश हुए सीनियर वकील विकास सिंह ने कहा कि 12वीं का नतीजा काफी अहम है। ऐसे में पहले के रिजल्ट के आधार पर नया रिजल्ट देना सही नहीं है। अगर कोर्ट ने ऐसा होने से नहीं रोका तो भविष्य में इससे जुड़ी इतनी याचिकाएं कोर्ट के पास आएंगी कि वो परेशान हो जाएगा। भविष्य को देखते हुए जो छात्र इच्छुक हों, उनके लिए डबल मास्क जैसे सख्त नियमों के साथ परीक्षा करवाई जाए।
क्या है रिजल्ट का आधार?
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को दो हफ्ते के अंदर रिजल्ट तैयार करने का फॉर्मूला पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 17 जून को हुई सुनवाई में बोर्ड ने कोर्ट के सामने पूरा प्लान पेश किया। जिसके तहत 12वीं के रिजल्ट के लिए छात्र के 10वीं और 11वीं के नंबरों को 30-30 फीसदी और 12वीं के इंटरनल मार्क्स को 40 फीसदी आधार बनाया जाएगा।












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