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UPPCL पीएफ घोटाले में CBI करेगी तीन IAS अफसरों के खिलाफ जांच? यूपी सरकार से मांगी अनुमति

नई दिल्ली, जनवरी 31। उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल के बीच केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने यूपी सरकार से तीन वरिष्ठ नौकरशाहों की एक घोटाले में कथित भूमिका को लेकर जांच की अनुमति मांगी है। जानकारी के मुताबिक, इनमें से 2 अफसर इस वक्त केंद्र में तैनात हैं।

CBI

4300 करोड़ रुपए के घोटाले से जुड़ा है मामला

आपको बता दें कि यह मामला उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के PF घोटाले से जुड़ा है, जिसमें कथित रूप से 4300 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है। इस कथित घोटाले में DHFL और अन्य हाउसिंग वित्तीय कंपनियों में निवेश में कथित अनियमितताओं के संबंध में तीन वरिष्ठ नौकरशाहों की कथित भूमिका से जुड़ा है।

इन नौकरशाहों के खिलाफ जांच की मांगी गई अनुमति

जानकारी के मुताबिक, सीबीआई ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17 (ए) के तहत राज्य सरकार से जांच की अनुमति मांगी है। सीबीआई ने जिन तीन अफसरों के खिलाफ जांच की अनुमति मांगी है- उनमें IAS संजय अग्रवाल (1984 बैच) आईएएस, आलोक कुमार (1988 बैच) आईएएस और अपर्णा यू 2001 (2001 बैच) का नाम शामिल है। संजय अग्रवाल 2013-17 के बीच यूपीपीसीएल के अध्यक्ष थे। आलोक कुमार मई 2017 से नवंबर 2019 तक यूपीपीसीएल के अध्यक्ष थे और अपर्णा यू ने प्रबंध निदेशक के रूप में भी काम किया।

आपको बता दें कि संजय अग्रवाल वर्तमान में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्यरत हैं। वहीं अपर्णा यू यूपी में प्रधान सचिव के पद पर तैनात हैं। तीनों यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। सीबीआई को मार्च 2020 में मामला सौंपा गया था और यह पाया गया था कि भविष्य निधि के तहत यूपीपीसीएल कर्मचारियों की बचत के 4300 करोड़ रुपये से अधिक कथित तौर पर डीएचएफएल और अन्य हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में निवेश किए गए थे।
डीएचएफएल में लगभग 4122 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया था और 2200 करोड़ रुपये से अधिक अभी भी लंबित हैं। पहली प्राथमिकी लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी और यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को जांच सौंपी गई थी।

प्राथमिकी में यूपी राज्य बिजली क्षेत्र कर्मचारी ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता और यूपीपीसीएल के तत्कालीन निदेशक, वित्त सुधांशु द्विवेदी पर आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप लगाया गया था। जांच में पता चला कि यूपीपीसीएल के कर्मचारियों की भविष्य निधि अक्टूबर 2016 तक राष्ट्रीयकृत बैंकों की सावधि जमा जैसे अल्पकालिक जमा में निवेश की गई थी।

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