जगन मोहन सरकार का बड़ा फैसला, 15 नवंबर से आंध्र प्रदेश में होगी जातिगत जनगणना

बिहार के बाद अब आंध्र प्रदेश सरकार ने भी जातिगत जनगणना कराने का फैसला ले लिया है। राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चौधरी श्रीनिवास वेणुगोपाल कृष्णा ने इसकी घोषणा की है।

बुधवार को राज्य सचिवालय में मीडिया में बात करते हुए चौधरी श्रीनिवास वेणुगोपाल कृष्णा ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार पिछड़े वर्गों की पहचान करने और उनके विकास के लिए योजनाएं चलाने के मकसद से 15 नवंबर से जाति जनगणना कराएगी।

jagan mohan reddy

उन्होंने कहा, 'देश में जातिगत जनगणना की शुरुआत 1872 में हुई और 1931 तक हर साल ये होती रही। लेकिन, 1951 के बाद से केवल जनगणना हो रही है। इस जनगणना में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को छोड़कर सभी जातियों को समग्र रूप से गिना जाता है, जिसके चलते पिछड़े वर्ग के बीच कई उप-जातियों की अनदेखी हुई। आज पिछड़े वर्गों के बीच पिछड़ी हुई उप-जातियों की पहचान होना जरूरी है, ताकि सरकार उनके विकास के लिए योजनाएं चला सके।'

टीडीपी सरकार ने किया पिछड़े वर्ग को नजरअंदाज
श्रीनिवास वेणुगोपाल कृष्णा ने आगे कहा, 'पिछड़े वर्ग से जुड़े कई संगठनों ने पिछली सरकार के दौरान जातिगत जनगणना करने की मांग उठाई, लेकिन टीडीपी सरकार ने इस मांग को नजरअंदाज किया। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। अपने मंत्रिमंडल में पिछड़े वर्ग के 10 विधायकों को शामिल करके और पिछड़े वर्ग की 139 जातियों के लिए निगम स्थापित करके सीएम जगन मोहन रेड्डी ने इस वर्ग को प्राथमिकता दी है। साथ ही अब, जगन मोहन सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का भी फैसला ले लिया है।'

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